इस्लाम में यौन मनोविज्ञान कि अवधारणा - 1

इस्लाम के संदेश को यदि ध्यानपूर्वक विशलेषण किया जाय तो यह विषय यौन-विज्ञान का नूतन सिद्धांत है जो कि दैहिक भोग और विवेकहीन हिंसा, इन दो स्तंभों पर आधारित है


यह सिद्धांत उस अल्लाह के नाम होता है जो सर्वाधिक दयालु और सर्वोत्तम निर्णायक होने का दावा करता है यद्यपि यह मजहब इन स्तंभों के बिना खड़ा नहीं हो सकता है, इन्हें बड़ी चतुराई से दैवीय आवरण में छिपा दिया गया है इस्लाम को बौद्धिक कि कसौटी पर कसते ही इसकी चमक-दमक समाप्त हो जाती है
इतिहाश साक्षी है कि मोहम्मद में जितना प्रभुत्व कि ललक थी उतनी और किसी भी व्यक्ति में नहीं थी यदि हम सम्पूर्ण मानव समाज को एक पिरामिड के रूप में देखे तो “अरबी पैगम्बर” को ही पायेंगे, उन्होंने मानव जाती के आचरण के लिए स्वयं को दैवीय मानव के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका तात्पर्य यह है कि सभी को उसके अनुसार सोचना एवं अनुभव करना चाहिए, उसके अनुसार ही खाना-पीना चाहिए और सभी कानून जो उन्होंने अल्लाह के नाम पर बनाये है उनकी अपनी सुविधा के अनुकूल ही है
केवल अल्लाह में विश्वास ही का कोई महत्त्व नही है, इससे दैवीय कृपा और जन्नत तब तक नहीं मिलेगा जब तक मोहम्मद में विश्वास न व्यक्त किया जाय | वह एक ऐसे बिचौलिया है कि कयामत के दिन उसका शब्द ही इसका निर्णय करेगा कि कौन जन्नत में जायेगा और कौन दोखज में | इतना ही नहीं, अल्लाह और उसके फरिस्ते भी मुहम्मद के पूजा करते है
इसी से मोहम्मद कि प्रभुत्व कि ललक कि तीब्रता सिध्द होती है
यीशु मसीह भी यहोवा गाड कि पूजा करते हुए पाए गए थे “लेकिन अल्लाह और उसके फरिस्ते तो मोहम्मद कि पूजा करते है"
इस प्रकार कि स्थिति के जो कि मनुष्य और अल्लाह दोनों कि ही पकड़ से परे है, अर्जन के लिए धैर्य, आयोजन एवं शक्ति कि आवश्यकता है पैगम्बर को ये सभी मिले थे और उन्हें, इन सबको असामान्य सफलतापूर्वक संचालित करने कि योग्यता भी मिली थी
पैगम्बर ने यह सुनिश्चित कर लिया था कि उनका राष्ट्र एक अजेय सैन्य शक्ति बने ताकि एक ऐसी शक्तिशाली साम्राज्य बन जाए, जोकि उनकी व्यक्तिगत पवित्रता एवं शिक्षा कि पुनिताता पर टिका हो| यातना अत्याचार और उत्पीडन कि प्रचंड खुराक दे सकने में सिध्द एक अति शक्ति संपन्न एवं निडर सेना निर्माण द्वारा अरब साम्राज्य स्थापना के अपने उद्देश्य कि पूर्ति के लिए पैगम्बर ने पुरुषों को आकर्षित करने के हेतु कामोत्तेजना को सबसे आकर्षण बल के रूप में प्रयोग किया
तथापि यह समझ कर कि पुरुष सिर्फ शारीरिक भोग तक सिमित नहीं रहता, तो उन्होंने अपील के आकर्षण का क्षेत्र विस्तृत करके जिहाद का अन्वेषण किया जिससे पवित्र सैनिको (मुजाहिद) कि न सिर्फ स्त्री और लडको कि ही प्रभुत मात्र कि पूर्ति होती थी , बल्कि गैर मिस्लिमो को लुटाने और उनकी हत्या को भी क़ानूनी रूप दे दिया, जो इस प्रकार अल्लाह को प्रसन्न करने का एक सबसे अच्छा रास्ता बन गया
यह पैगम्बर की शतरंजी चाल थी जिसके द्वारा उनके अनुयायियों के मस्तिष्क एक जबरदस्त विश्वास हो गया कि लूटपाट, हत्या बलात्कार तथा वर्णनातीत दुःख दर्द फैलाना, बच्चो को अनाथ और स्त्रियों को बिधवा करना जिहाद ( पवित्र युध्द ) के रूप में इस्लाम का सर्वोच्च काम है जिसके द्वारा जन्नत के द्वार खुलने कि पूरी गारंटी है
माना कि मुहम्मद के पहले भी बड़े-बड़े विजेता हुए है परन्तु किसी ने भी इसे अतुअचारो कि पवित्रता का दर्जा नहीं दिया जिनके बदले में आशीष, मंगलकामनाए एवं आनंद मिले| मस्तिष्क की सफाई की यह शक्ति जो पैगम्बर मोहम्मद के पास थी, वह ना केवल भरी मात्रा में थी सदैव की रहने वाली थी क्योकि यह दोनों ही रूपों में चौदह शताब्दियान बीत जाने के बाद भी अभी भी उसी मजबूती से चल रही है




क्रमश: ........... अगले ब्लॉग में






स्रोत – इस्लाम : काम वासना और हिंसा ( अनवर शेख )

10 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

अजय जी नमस्ते
बहुत बहुत आभार इस जानकारी क़े लिए-------- सम्पूर्ण हिन्दुओ को कुरान और मुहम्मद क़े बारे में जानकारी जरुरी है ये मुहब्बत,शांति क़ा धर्म बताकर दुनिया को दिग्भ्रमित कर रहे है वास्तव में कुरान और इस्लाम ही मदरसों क़े माध्यम से आतंकबादी तैयार करता है.ये धर्म नहीं आतंकबादियो क़ा समूह है जिसने दुनिया को तबाह कर रखा है .
.बहुत-बहुत धन्यवाद.

zakir ने कहा…

ajay ji yahan par jo islam ke bare me information di gai hai ...wo bilkul galat hai ......Islam me kewal ALLAH hi pujniya yogya hai ...aur koi puja ya ibadat ke layak nhi ...mohammad sallahi alle hi wasslam bhi nhi

ms khan ने कहा…

mr.ajay jis tarah se tum log islam ke baare me galal aur bhramak jaankari apne blog ke maadhyam se logo ko de rahe ho yah sahi nahi hai. islam ki burai karne ka theka lagta hai tune le rakkha hai.tumhare blog ko dekhkar to lagta hai ki tum ek nihayat hi sanskaar heen aadmi ho.tumhara dharam tumhen yah izazat deta hoga ki dusre dharam ki bubai karo lekin hame hamara dharam yah izazat nahi deta ki me kisi aur dharam ki burai karun.yah kisne kaha hai ki musalmaan pegambar hajrat muhammd s.a.w. ko poojte hain. jaiye apne dharam grantho ko padiye shayad tumhare andar bhi kuch sanskaar aa jayen.........

Sujeet Singh ने कहा…

हां तुमारा धर्म दूसरों धर्मो के लोगो को मारने कटने कि बाते करता है ये गलत नहीं है सच्चाई है |

अगर फिर भी तुम्हे गलत लगता है तो अपने मेल एड्रेस लिख दो मैं साबुत दूँगा |
अपनी हकीकत क्यों दूसरों के ऊपर थोप रहे हो ? तुम जा कर पढ़ो | अगर कही नहीं मिले तो www.bhandafodu.blospot.com पर जाकर पढ़ो |

Nafees Malik ने कहा…

इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी।हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की तो क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 4 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने गणेश को जन्म दिया शिव की पीछे। पार्वती ने फिर किस के साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो को नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो को एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ लोग जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे ना मुस्लिम है और ना ही इन्सान जानवर है। राम और कृष्ण के तो मा बाप थे क्या कोई इ

Deepak Saini ने कहा…

सही दि गयी है. इस्लाम केवल तलवार कि नोक पर फैला है. औरंगजेब और बाबर का इतिहास देखलो या फिर आपके भाई बन्धु isis और पाकिस्तान को देख लो

Deepak Saini ने कहा…

अबे औ लोवडे. जाकर दुसरो को गाली दै पार्वती माता ने गणेश जी को अपने मैल स बनाया था और कृष्ण जी ने अधर्म के खिलाफ लडने को कहा था. और कपडे केवल इस लिये चूराए थे कि वो सखियो को निवस्त्र पानी मे नहाने से मना करने के लिये. तू जैनता क्या है हमारे धर्म के बारे मै. जिसका अल्ला काफिरो से डर जाये और दुसरो को मारनो को कहे

Deepak Saini ने कहा…

तूमहारे पास सबुत क्या है अपने धर्म का कुछ भी नही केवल मक्का के. उमे भी छुपा रक्खा है. हमारे पास. रामसेतू है. भार और श्रीलंका के बीच राम जी के नाम के पत्थर टैर रहे है. और जा जाकर देख ले. गोरी कुण्ड का पानी जिसमे चावल डालने पर चावल उबल जायेगे और हाथ लगाने से पानी ठंडा. मानसरोवर. केदारनाथ से थोडा सा आगे. , ज्वाला देवी कि अग्नी, जो पानी के अन्दर कई सालो से जल रही है. और भी बहुत कुछ है केदारनाथ कि आपदा अभी चार साल पहले आयी थी. जिसमे सब कुछ बर्बाद हो गया तबाह हो गया लेकिन मन्दिर को एक खरोच भी नही आयी. तूम्हारो पास तो कोई सबुत नही है

Deepak Saini ने कहा…

क्या सबुत है. इस्लाम का. बताऔ.

Deepak Saini ने कहा…

जब इस्लाम कोई धर्म ही नही है तो सबुत क्या धण्टा होगा