अमेरिका पर 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकी हमले में देश की गुप्तचर सेवा पूरी तरह से विफल रही थी।

राजधानी दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फार डिफेंस स्टडीज एंड एनेलिसिस में सीनियर रिसर्च एसोसिएट राजीव नयन का मानना है कि हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवादी संगठन अलकायदा के खिलाफ जो अभियान शुरू किया था उसमें उसने पाकिस्तान पर भरोसा कर बहुत बड़ी गलती की।

पाकिस्तान कभी भी अमेरिका को इस अभियान में पूरा सहयोग नहीं देगा जिसके कारण उसके सफल होने की संभावना भी कम होगी।
राजीव नयन ने कहा कि आतंकवाद को पालने पोसने करने वाला पाकिस्तान भी अब आतंकवाद का दंश झेल रहा है। आतंकवाद पाकिस्तान की जड़ों में इतने अंदर तक समा गया है कि इसे नष्ट करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारत सहित पूरे विश्व में 11 सितम्बर को हुए आतंकवादी हमले के बाद ऐसे हमले रोकने के लिए व्यापक तैयारी हुई है लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि आतंकवादी पहले के हमले में प्रयोग तरीका नहीं दोहराएंगे।
अमेरिका में 11 सितंबर के हमले में मारे गए लोगों की याद में प्रतिवर्ष 11 सितम्बर ‘पैट्रियट डे’ के रूप में मनाया जाता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 25 अक्टूबर 2001 को संयुक्त प्रस्ताव 71 पारित किया था। प्रस्ताव का 407 सांसदों ने समर्थन किया था जबकि इसके विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा था। प्रस्ताव में अनुरोध किया गया था कि राष्ट्रपति प्रतिवर्ष 11 सितम्बर के दिन को पैट्रिअट डे के रूप में मनाना निर्धारित करें।
तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने 18 सितम्बर 2001 को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप प्रदान कर दिया। शुरूआत में इस दिन को आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने का दिन कहा जाता था। चार सितम्बर 2002 को बुश ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 11 सितम्बर 2002 के दिन को पैट्रिअट डे घोषित कर दिया।
पैट्रिअट डे के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की याद में देश के सभी घरों, राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस, देश एवं विदेशों में स्थित सरकारी इमारतों और प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी झंडे को आधा झुकाने का आह्वान करते हैं। राष्ट्रपति इसके साथ ही सभी नागरिकों से स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 46 मिनट पर कुछ समय के लिए शांति रखने को कहते हैं। यह वही समय है जब आतंकवादियों ने 11 सितम्बर 2001 को अपहृत पहला विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नार्थ टॉवर बिल्डिंग से टकराया था।
11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले में सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्रों के कुछ समुदाय के लोग पैट्रिअट डे के दिन गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। इसके साथ ही 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले का व्यक्तिगत रूप से साक्षी रहने वाले अथवा इसमें अपने प्रियजनों को खोने वाले लोग मारे गए लोगों की स्मृति स्थलों पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
पैट्रिअट डे के दिन कोई संघीय अवकाश नहीं होता इसलिए इस दिन शिक्षण संस्थाएं और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद नहीं होते। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अपने पूर्व निर्धारित समयानुसार चलती हैं। हालांकि कुछ लोग अथवा संगठन हमले में मारे गए लोगों की याद में कुछ समय के लिए सेवाएं रोक सकते हैं। लेकिन सामान्य तौर पर इसके कारण सार्वजनिक जीवन कुछ मिनट के लिए ही ठहरता है।
11 सितम्बर 2001 को चार विमानों का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता आतंकवादियों ने जानबूझकर महत्वपूर्ण इमारतों से टकराया। इन इमारतों में वाशिंगटन स्थित पेंटागन तथा न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावर शामिल थे। चौथा विमान पेंसिलवानिया के एक मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हमले में करीब तीन हजार लोग मारे गए और काफी बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।
अमेरिका के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था। इस आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई। इस घटना का अमेरिका के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी काफी प्रभाव पड़ा। इस घटना के कारण विशेष रूप से पश्चिम एशिया के इस्लामी देशों के साथ अमेरिका के संबंधों पर काफी प्रभाव पड़ा।

1 टिप्पणी:

दीर्घतमा ने कहा…

जैसा भी अमेरिका ने ऐसा कदम उठाया कि आतंक बादियो कि द्बारा हिम्मत नहीं पड़ी भारत पर प्रतिदिन आतंक बादी हमले हो रहे है लेकिन हमारा कमजोर नेतृत्व केवल बात करने क़े अलावा कुछ नहीं करता आज अमेरिका ही इस्लामिक आतंकबाद क़ा जबाब दे रहा है यदि ओबामा ने कार्यवाही बंद कर दी तो उनका रहना मुस्किल होगा