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"आतंक का कोई मज़हब नहीं होता"... ??

"आतंक का कोई मज़हब नहीं होता"...

 इसीलिए अमेरिका में अब सूअर की चर्बी युक्त बन्दूक एवं AK-47 की गोलियों की बम्पर बिक्री शुरू हो गई है...

इन गोलियों में बारूद के साथ सूअर का माँस और चर्बी है, और ब्राण्ड नेम है "जिह्वाग एमो" !

इस कम्पनी को आरम्भ करने वाले मिस्टर ब्रैंडन कहते हैं कि जन्नत की चाह रखने वालों के लिए यह गोलियाँ खासतौर पर डिजाइन की गई हैं.

पति-पत्नी की टीम इन गोलियों के प्रमोशन हेतु टीशर्ट और टोपियां भी बेच रही है जिन पर लिखा हुआ है, "72 हूरों की मदद करो—जिहाग ऐमो गोलियों का इस्तेमाल करो.”

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कम से कम इतना तो मानना ही पड़ेगा कि हर "नई शुरुआत" अमेरिका से होती है...

चाहे ओसामा की लाश को समुद्र में फेंकना हो, या ग्वांतानामो की जेल में आतंकियों को दी जाने वाली अभिनव यातनाएँ हों...|

स्वाभाविक है कुछ नया सोचने और करने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है. हम जैसे बेशर्म लोग तो अभी भी ससम्मान भारी भीड़ के साथ याकूब और बुरहान के जनाजे निकलते हुए देखते रहते हैं...
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आन्ध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार कौन चला रहा है [Andhra Pradesh :wovaisi & Congress]

आन्ध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार कौन चला रहा है ? कांग्रेस या ओबैसी ? या दोनों मिलकर ? जिस नरपिशाच मोहम्मद अब्दुल कादिर नामक कांस्टेबल ने 1990 मे हैदराबाद मे भडकी भयानक दंगे के दौरान जब पुलिस इंस्पेक्टर ने इसे दंगो को नियन्त्रित करने के लिए मुस्लिम दंगाई भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया तो इसने दंगाईयों के बजाय उस इंस्पेक्टर को ही गोलियों से भून दिया था | लेकिन आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार ओबैसी के आदेश से इसे बार बार पेरोल क्यों दे रही है ?

चित्र में जिसे को आप देख रहे है उसका नाम है मोहम्मद अब्दुल कादीर है. यह भूतपूर्व पुलिस कांस्टेबल है.
१९९० में हैदराबाद में दंगा हुआ उस दंगे में जब इसका सीनियर इसे एक दंगाई मुस्लिम भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया तो ये भीड़ पर गोली चलाने के बजाय उस सीनियर पर ही गोली चला दी. न्यायालय के द्वारा इसे आजीवन कारावास की सजा मिली है लेकिन अभी इसकी क्षमा याचना रास्ट्रपति के पास है. इसको छुड़ाने के लिए बहुत से मुस्लिम संगठन लगे हुए है. |

मित्रों, आन्ध्र की पहले की टीडीपी सरकार ने इसे एक मिनट भी पेरोल नही दिया, लेकिन आज की कांग्रेस सरकार इसे ओबैसी के कहने पर बार बार पेरोल पर रिहा कर रही है और इतना ही नही इसके पेरोल को बार बार बढाती भी रहती है |

मित्रों, ये दोनों ओबोसी असदुद्दीन ओबैसी जो हैदराबाद से सांसद है और अकबरुद्दीन ओबैसी जो हैदराबाद के चारमिनार से विधायक है इन दोनों का मुख्य मकसद भारत को इस्लामिक राष्ट्र घोषित करना है | 
अगर आप इनकी पार्टी मजलिसे ईतेहादुल मुस्लिम [MIM] के सम्मेलनो के वीडियो यूट्यूब पर देखेंगे तो ये बार बार कहते है कि भारत को इस्लामिक देश बनाना ही मुस्लमानों का प्रथम उद्देश्य होना चाहिए |

ये अकबरुद्दीन ओवैसीने कई बार हिंदूधर्म और हिंदू देवी देवताओ के बारे मे खुले मंच से बहुत ही अभद्र बाते कहीं है लेकिन राहुल और सोनिया इसे गलत नही मानते क्योकि इसने हिन्दुओ के देवी देवताओ को अपमानित किया है | आप इस वीडियो को देखे , इसमें ये नीच ओवैसी भगवान राम और उनकी माँ कौशल्यादेवी पर किस तरह अश्लील और अभद्र बाते कह रहा है |



लेकिन  राहुल और सोनिया तो यही चाहते है किभारत से हिंदुत्व खत्म हो जाये और हिन्दुओ को बार बार अपमानित किया जाये |

मित्रों, अभी कुछ दिन पहले इस अकबरुद्दीन ओवैसी पर जानलेवा हमला हुआ, मजे की बात ये की हमलावर भी मुस्लिम ही था जिसका वेशकीमती घर इन ओवैसी बंधुओ ने कब्जा कर लिया था |
इसका हालचाल लेने के लिए सोनिया गाँधी ने मुख्यमंत्री सहित पूरी आन्ध्रप्रदेश सरकार को उसके घर भेजा था और तो और केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद भी स्पेशल प्लेन से हैदराबाद उसका हालचाल लेने गए थे | 
मित्रों  जब बाला साहेब ठाकरे की धर्मपत्नी और उनके पुत्र की एकमहीने के भीतर ही दुखद मृत्यु हुआ था तब तात्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा मातोश्री बाला साहेब को सात्वना देने गए थे तब लेफ्ट, सपा, और कांग्रेस ने संसद मे बहुत हंगामा मचाया था कि एक साम्प्रदायिक नेता के घर प्रधानमंत्री सात्वना देने क्यों गए ? और तो और उस समय शरद पवार कांग्रेस मे थे और जब शरद पवार गए तो कांग्रेस ने उनसे नोटिस देकर पूछा कि आप क्यों गए ?

आखिर इतना दोगलापन क्यों ? एक कट्टर मुस्लिम जिसके सैकडो भड़काऊ भाषण आज भी यू ट्यूब पर भरे पड़े है और जो संसद मे मुसलमानों को इस देश की ईंट से ईंट बजा देने का आह्वान करता है उसके घर जाना क्या कांग्रेस गलत नही समझती ? 
आन्ध्र के उपमुख्यमंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए






आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए


आन्ध्र के रेवेन्यूमंत्री रघुवीर रेड्डी, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए


आन्ध्र प्रदेश विधानसभा के स्पीकर एन मनोहर, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए

स्पीकर मनोहर, ओवैसी के घर नाश्ता करते हुए

स्पीकर खुद सहारा देकर ओवैसी को घर से बाहर ला रहे है

सोनिया गाँधी के निर्देश पर केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ओवैसी के घर जाकर उसके स्वस्थ्य की जानकरी ली और सोनिया और राहुल को इस बारे मे रिपोर्ट दिया ..


मेरे हिंदू मित्रों, जागो और अपने जातिपाँति, ऊँचनीच आदि के भेदभाव भुलाकर संगठित हो जाओ | नही तो हिन्दुओ के लिए आने वाला कल बहुत ही भयानक होने वाला है |




यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?


लेबनान मे गृहयुद्ध प्रभावित एरिया का निरीक्षण करता ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?

मित्रों, इजराइली ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल मे आतंकवाद फैला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवको का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है | लेकिन चूँकि भारत की कांग्रेस सरकार को सिर्फ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है |

मित्रों अभी कुछ दिन पहलेसंसद मे आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि "यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे" लेकिन किसी भी कांग्रेसी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की | और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज़ नही बताया सिर्फ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की |

सबसे बड़ी चौकने वाला खुलासा ये है कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिपारिश पर मिला था जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस की ही सरकार की ख़ुफ़िया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता और अहर्ता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट इस्शु कर दिया |

मित्रों, साधारण  पासपोर्ट का कलर नीला होता है बल्कि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाईअड्डे पर तलाशी नही होती और इन्हें "वीजा आन अराइवल" की भी सुविधा होती है और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों मे मुख्यमन्त्रियो और राजदूत तथा दूतावास मे सचिव स्तर के अधिकारियों  को ही इस्शु हो सकता है | 


मित्रों, हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है जो छोटे छोटे बच्चो को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है | लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था और वहाँ ४% हिंदू और १०% यहूदी  भी रहते थे | लेबनान जहां पहले ८०% ईसाई तथा अन्य धर्म और २०% मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था | और इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी | इतना ही नही खूबसूरत लेबनान मे कई हालीवुड और बोलिउड की फिल्मो की शूटिंग होती थी | रामानंद सागर ने सत्तर के दशक मे धर्मेन्द्र और माला सिन्हा को लेकर एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम "आखें' उस फिल्म की 80% शूटिंग बेरुत मे हुई थी और कई गाने जैसे "मिलती है जिंदगी मे मोहब्बत कभी कभी" की शूटिंग भी बेरुत मे ही हुई |



लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर लेबनान  के मुस्लिम लीडरो ने ग्रहण लगा दिया |मस्जिदों मे और अपने सम्मेलनों के मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर क्ब्ज्जा करने की बाते करते थे | फिर धीरे धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड गया और फिर लेबनान 25 सालो से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया | आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमे ईसाई और अन्य धर्मो के लोग रहते है और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है उसी तरह राजधानी बेरुत का भी दो अघोषित हिस्सा है जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते है |


मित्रों, जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है तो उसे लोकसभा अध्यक्ष की लिखित अनुमति लेनी पडती है भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो | एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फ़ाइल नही आई जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो |


अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाला ओबैसी को कांग्रेस साम्प्रदायिक क्यों नही मानती ? 


मित्रों, कांग्रेस की नजर मे  सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है | अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा | पूरी मीडिया और कांग्रेस सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे | लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा | यहाँ मैंने "सिर्फ" इसलिए लिखा है क्योकि ओबैसी ने आजतक संसद मे सिर्फ मुस्लिम हित और मुस्लीमों के बारे मे ही मुद्दे उठाये है और सिर्फ मुस्लिम लोगो की ही मदद करते है यहाँ तक आसाम मे भी जो उन्होंने रिलीफ कैम्प लगाया उसके उपर लिख दिया " only for muslims" इन्होने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया लेकिन जब एक पत्रकार ने इसने पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो ये माइक फेक दिये |

मित्रों, आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद मे भडके कई दंगो के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है यहाँ तक की केन्द्र की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है | लेकिन सब बेकार |

सोचिये क्या राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी या तोगड़िया या अशोक सिंघल जी के साथ फोटो खिचवा सकते है ? नही क्योकि ये लोग तो हिन्दुवादी है और भारत मे हिन्दुवादी होना सबसे बड़ा अपराध है |


लेकिन वहीराहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ओबैसी के साथ कई कई घंटो तक बैठते है और उसके साथ फोटो खिचवाते है | क्योकि सोनिया ने जो काला कानून "साम्प्रदायिक हिंसा निवारण बिल" बनाया था उसके अनुसार तोसिर्फ हिंदू ही दंगाई होते है, हिंदू हिंसक होते है और हर बार सिर्फ हिंदू ही पहले दंगे भड़काते है |


मित्रों, सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मीडिया और कांग्रेस की हिन्दुओ के बारे मे इस दोगली मानसिकता का जिम्मेदार कौन है ? 

मित्रों, इसके जिम्मेदार हम सब हिंदू  खुद ही है | ये हम हिंदू ही है जो सब कुछ जानते समझते हुए भी जतिपति और दूसरे छोटे छोटे मुद्दों और कांग्रेस के द्वारा दिये गए झूठे लालचो और प्रलोभनों के बहकावे मे आकर इस कांग्रेस को वोट देकर इसे मजबूत करते है | हिंदू मित्रों, अपने बारे मे तो नही कम से कम पचास साल बाद आने वाली अपनी हिंदू पीढियों के बारे मे सोचो | जो हाल पाकिस्तान, सीरिया, लेबनान, इंडोनेशिया, फिलीपींस और भारत मे कश्मीर, केरल और आसाम मे हिन्दुओ के साथ हुआ है और जो आज हिंदू इन जगहों पर पर अत्याचार झेल रहे है वही आज के पचास सालो के बाद पूरे भारत मे झेलेंगे |

           

                     जय हिंद !!! जय भारत !!! वन्देमातरम !!

आतंकवाद का कारण है इस्लाम



जो मुसलमान कहते हैं इस्लाम तो शांति का मजहब है वे यह बताए कि जब सारी दुनिया के मुसलमान इन बातों पर सहमत हैं कि इस्लाम ही एकमात्र सच्चा धर्म है http://www.islamhouse.com/p/289311 तो शांति कैसे आ सकती है ? अब वे यह बात क्यों कहते हैं या तो वे इस्लाम के मूल सिद्धान्त को नहीं जानते या फिर वे हिन्दुऒं को मूर्ख बनाने के लिए एसा कहते हैं । अन्य धर्मावलम्बयों को इस्लाम की शांति समझाने से पहले वे स्वयं आपस में एकमत हो जाएं । भारत के मुसलमानों को इस फतवे का जवाब देना होगा व यदि नहीं देते तो फतवे को ठीक मानकर हिन्दुऒं को जिहाद का जवाब देने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । यह फतवा सभी सेक्यूलर कहलाने वाले नेताऒं के मुंह पर तमाचा है । इसे पढ़ने के बाद वे किस मुंह से इस्लाम की तरफदारी करेंगे? हिन्दुओं की मूल समस्या यह है कि वे जैसे स्वयं हैं इस्लाम व ईसाइयत को भी उसी श्रेणी में रखते हैं और इसी कारण वे आज तक इसलाम के हाथों मार खाते रहे हैं । :
उक्त फतवे से यह स्पष्ट हो गया है कि मुसलमान किसी भी देश में अन्य धर्मावलम्बियों के साथ नहीं रह सकते हैं । सऊदी आरब की साइट इस्लाम हाउस में एक फत्वा इसी विषय पर लिया गया है । विषय है

‘‘ क्या अन्य धर्मों की इस्लाम के साथ एकता स्थापित की जा सकती है ।”

इस फतवे को पढ़कर समस्त देशवासी जवाब दें कि क्या इस्लाम व मुसलमानों से कुरआन व शरीयत में एसी खतरनाक बातों के रहते विश्वास किया जा सकता है ? मुसलमान जवाब दें कि इनमें कौन सी बात वे भारत के मदरसों में नहीं पढ़ाते हैं ? क्या उन्होंने कुरआन व हदीस को संशोधित करके पढ़ाना शुरू कर दिया है ?यदि नहीं तो वे हिन्दुऒं के किसी भी प्रतिकार पर शोर मचाना बंद कर दें क्योंकि यह संविधान