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यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?


लेबनान मे गृहयुद्ध प्रभावित एरिया का निरीक्षण करता ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?

मित्रों, इजराइली ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल मे आतंकवाद फैला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवको का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है | लेकिन चूँकि भारत की कांग्रेस सरकार को सिर्फ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है |

मित्रों अभी कुछ दिन पहलेसंसद मे आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि "यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे" लेकिन किसी भी कांग्रेसी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की | और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज़ नही बताया सिर्फ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की |

सबसे बड़ी चौकने वाला खुलासा ये है कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिपारिश पर मिला था जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस की ही सरकार की ख़ुफ़िया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता और अहर्ता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट इस्शु कर दिया |

मित्रों, साधारण  पासपोर्ट का कलर नीला होता है बल्कि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाईअड्डे पर तलाशी नही होती और इन्हें "वीजा आन अराइवल" की भी सुविधा होती है और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों मे मुख्यमन्त्रियो और राजदूत तथा दूतावास मे सचिव स्तर के अधिकारियों  को ही इस्शु हो सकता है | 


मित्रों, हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है जो छोटे छोटे बच्चो को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है | लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था और वहाँ ४% हिंदू और १०% यहूदी  भी रहते थे | लेबनान जहां पहले ८०% ईसाई तथा अन्य धर्म और २०% मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था | और इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी | इतना ही नही खूबसूरत लेबनान मे कई हालीवुड और बोलिउड की फिल्मो की शूटिंग होती थी | रामानंद सागर ने सत्तर के दशक मे धर्मेन्द्र और माला सिन्हा को लेकर एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम "आखें' उस फिल्म की 80% शूटिंग बेरुत मे हुई थी और कई गाने जैसे "मिलती है जिंदगी मे मोहब्बत कभी कभी" की शूटिंग भी बेरुत मे ही हुई |



लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर लेबनान  के मुस्लिम लीडरो ने ग्रहण लगा दिया |मस्जिदों मे और अपने सम्मेलनों के मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर क्ब्ज्जा करने की बाते करते थे | फिर धीरे धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड गया और फिर लेबनान 25 सालो से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया | आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमे ईसाई और अन्य धर्मो के लोग रहते है और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है उसी तरह राजधानी बेरुत का भी दो अघोषित हिस्सा है जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते है |


मित्रों, जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है तो उसे लोकसभा अध्यक्ष की लिखित अनुमति लेनी पडती है भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो | एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फ़ाइल नही आई जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो |


अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाला ओबैसी को कांग्रेस साम्प्रदायिक क्यों नही मानती ? 


मित्रों, कांग्रेस की नजर मे  सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है | अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा | पूरी मीडिया और कांग्रेस सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे | लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा | यहाँ मैंने "सिर्फ" इसलिए लिखा है क्योकि ओबैसी ने आजतक संसद मे सिर्फ मुस्लिम हित और मुस्लीमों के बारे मे ही मुद्दे उठाये है और सिर्फ मुस्लिम लोगो की ही मदद करते है यहाँ तक आसाम मे भी जो उन्होंने रिलीफ कैम्प लगाया उसके उपर लिख दिया " only for muslims" इन्होने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया लेकिन जब एक पत्रकार ने इसने पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो ये माइक फेक दिये |

मित्रों, आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद मे भडके कई दंगो के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है यहाँ तक की केन्द्र की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है | लेकिन सब बेकार |

सोचिये क्या राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी या तोगड़िया या अशोक सिंघल जी के साथ फोटो खिचवा सकते है ? नही क्योकि ये लोग तो हिन्दुवादी है और भारत मे हिन्दुवादी होना सबसे बड़ा अपराध है |


लेकिन वहीराहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ओबैसी के साथ कई कई घंटो तक बैठते है और उसके साथ फोटो खिचवाते है | क्योकि सोनिया ने जो काला कानून "साम्प्रदायिक हिंसा निवारण बिल" बनाया था उसके अनुसार तोसिर्फ हिंदू ही दंगाई होते है, हिंदू हिंसक होते है और हर बार सिर्फ हिंदू ही पहले दंगे भड़काते है |


मित्रों, सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मीडिया और कांग्रेस की हिन्दुओ के बारे मे इस दोगली मानसिकता का जिम्मेदार कौन है ? 

मित्रों, इसके जिम्मेदार हम सब हिंदू  खुद ही है | ये हम हिंदू ही है जो सब कुछ जानते समझते हुए भी जतिपति और दूसरे छोटे छोटे मुद्दों और कांग्रेस के द्वारा दिये गए झूठे लालचो और प्रलोभनों के बहकावे मे आकर इस कांग्रेस को वोट देकर इसे मजबूत करते है | हिंदू मित्रों, अपने बारे मे तो नही कम से कम पचास साल बाद आने वाली अपनी हिंदू पीढियों के बारे मे सोचो | जो हाल पाकिस्तान, सीरिया, लेबनान, इंडोनेशिया, फिलीपींस और भारत मे कश्मीर, केरल और आसाम मे हिन्दुओ के साथ हुआ है और जो आज हिंदू इन जगहों पर पर अत्याचार झेल रहे है वही आज के पचास सालो के बाद पूरे भारत मे झेलेंगे |

           

                     जय हिंद !!! जय भारत !!! वन्देमातरम !!

क्या आप सेक्युलर है ? Are you a secularist? -2

केरल में विधायक, संसद और मंत्री अल्लाह,यीशु के नाम से सपथ लेते है | अगर हिंदू राम या कृष्ण के नाम से ले तो संबिधान के खिलाफ है ?

अरबी भाषा को प्रमोट करने के लिए सरकार पैसे खर्च कर रही है | लेकिन संस्कृत पर क्यों नही ? क्या अरबी भाषा, संस्कृत के तुलना में अधिक राष्ट्रीय है ?

IMTD Act क़ानूनी अधिकार से असम में बंगलादेशियो को भारत में बसने और नागरिक बनने का अधिकार देता है | तो जम्मू और कश्मीर में शेष भारतीय को बसने का अशिकर क्यों नही ? यह दोगली निति क्या है ?

जम्मू और कश्मीर कि जनसंख्या लगभग एक करोड है जिन्हें २४००० करोड रुपये कि सहायता दी गयी है | यानी कि पर हेड २४००० रुपये | जबकि शेष राज्यों को इनसे ५% कम कि सहायता दी जाती है |क्या यह राष्ट्र विरोशियो के लिए इनाम नही है ?

यदि पेंटिंग करना गैर- इस्लामिक है तो मुसलमानों ने एम् एफ हुसैन के खिलाफ कितने फतवे जारी किये गए थे ? क्या वो गैर- इस्लामिक कार्य नही किया था ?

यदि इस्लाम में गायन, संगीत और नृत्य गैर- इस्लामिक है ( क्योकि इस्लाम एक गंभीर धर्म है ) तो बहुत “खान” फिल्म में अभिनय करते है | इनके खिलाफ फतवा क्यों नही जारी किया गया ?

क्या आप को लगता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश रहेगा यदि मुसलमानों का बहुमत हो जाय तो ?

हॉउस आफ कामंस, आस्ट्रेलिया संसद और ह्वाईट हॉउस आदि में जब दीपावली और जन्माष्टमी मनाया जाता है तो भारत के संसद में क्यों नही मनाया जाता है ? क्या हम संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया कि तुलना में अधिक धर्मनिरपेक्ष है ?

यदि सांप्रदायिक दंगे भारत में आर एस एस, विहिप, बजरंग दल आदि के कारन होता है तो “ पाकिस्तान, तुर्की, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चेचन्या, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, साईप्रस आदि में किसकी अजह से दंगे होते है ?” जब कि वहाँ पर आर एस एस / विहिप नही है |

एक पूर्व राष्ट्रपति, दो पूर्व प्रधानमंत्रियों, साधुओ,और संतो द्वारा कांची के संकराचार्य कि गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया है | लेकिन मिडिया का कहना है कि “वहाँ बिलकुल कोई विरोध नही हुआ है”| क्या आप को लगता है कि केवल हिन्=हिंसा ही लोगो की [पीड़ा मापने का पैमाना है ?

क्या आप को विश्वास है कि इस्लाम और ईसाईयत को सर्वधर्म समभाव में विश्वास है ? यदि हाँ, तो धर्म रूपांतरण में विश्वास क्यों करते है ?

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम – आप मुझे एक मुसलमान दिखाए जो इससे सहमत हो ?

क्या आप को नही लगता है कि “ सेक्युलर मुस्लिम एक मिथ्या नाम है ? एक व्यक्ति या तो सेक्युलर या मुसलमान हो सकता है, दोनों नही ? एक मुस्लिम ( जो केवल अल्लाह में विश्वास करता है) धर्म-निरपेक्ष(कई परमेश्वर में विश्वास) नही हो सकता है |

क्या आप जानते है कि “ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मौलाना वहीदुद्दीन, जब भारतीय सैनिक कारगिल में लड़ रहे थे तो, उनसे सैनिको के लिए प्रार्थना करने को कहा गया तो इंकार कर दिया ? क्योकि भारतीय सैनिक मुसलमानों से लड़ रहे थे ?” ( बाद में सोनिया और प्रियंका ने उसके अंतिम संस्कार में भाग ली थी )

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का कहना है कि “ अल्पसंख्यक का मतलब पूरी आबादी का अधिक से अधिक १०% होता है | मुसलमान, जो लगाभाग १८% से ऊपर है को एक अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है ?

क्या आप को विश्वास है कि “कम्युनिस्टों को भारत से प्यार है ?”, जब कि वे स्वीकार करने से मना करते है कि १९६२ में चीन भारत पर हमलावर था ?

ये कैसे होता है कि “ एक मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से हिंदू इलाके में शांति से रहता है, जबकि एक मुस्लिम बस्ती में एक हिंदू परिवार ऐसा करने में सक्षम नही है ?

मुस्लिम बहुत क्षेत्रो में ईसाई मिशिनारिज क्यों नही सामाजिक सेवाए शुरू कराती है ? क्योकि वहाँ निवेश पर पर्याप्त फल नहीं मिलेगा |

क्या आप जानते है कि “ भारत एक मात्र देश है जो खुले तौर पर बंगलादेश के घुसपैठियों को आमंत्रित किया है | बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों ने तत्काल उन्हें रासन कार्ड उपलब्ध कराके मतदाता बना दिया |”

दंगे शुक्रवार की नमाज के बाद ही ज्यादातर हुए है ( जैसे मरद, केरल) | क्या यह इमामों के ज्वलंत उपदेशो की वजह से नही है ?

सभी हिंदू बहुल क्षेत्र शांतिपूर्ण है, लेकिन सभी हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र समस्याग्रस्त है – जम्मू और कश्मीर, उत्तर – पूर्वी भारत आदि | क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते है कि ऐसा क्यों ?

एक विधायक, सी. पी. शाजी ने केरल विधानसभा में कहा कि “ वो हाथ काट दिया जायेगा, जो शरियत के एक अक्षर को छुयेगा” | क्या आप इससे सहमत है ?

क्या आप जानते है कि “भारत में अवैध रूप से आये मुस्लिम अप्रवाशी २५ लोकसभा और १२० विधानसभा सीटों के चुनाव में एक निर्णायक कारक बन गए है ? और वे एक विशेष पार्टी के लिए एकजुट हो के मतदान करते है – कंग्रस, राजद, सपा, एमएल, या साम्यवादी |”

एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?

अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद पूछताछ की लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से सवाल नही की? क्या यह सुप्रीम कोर्ट का दुहरा मापदंड नही है ?

जब आप नरेन्द्र मोदी जैसे लोगो से तुच्छ आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांग रहे है तो आप क्यों नही जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगते है ? जहां पर हजारों सैनिक आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए है और तो और ४ लाख हिन्दुओ का सफाया कर दिया गया है |

जम्मू और कश्मीर का पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एक ईसाई से शादी किया और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक हिंदू लडकी से शादी करके आनंदित थे, लेकिन जब उसकी बेटी एक हिंदू लड़के से शादी कर ली तो उसका परित्याग कर दिया गया | क्या यही धर्मनिरपेक्षता का पहचान है ?

कानून के अनुसार “ मानव अंगों को किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में नही लिया जा सकता है” तो कैसे कांग्रेस पार्टी को ‘हाथ’ का प्रतिक आवंटित किया गया है ? यह कानून के खिलाफ नही है ?

दिल्ली इमाम सैयद बुखारी के घोषणा थी कि तालिबान सभी मुसलमानों के लिए आदर्श है और ओसामा बिन लादेन नायक ? क्या आप इस धर्मनिरपेक्षता पर विचार करेंगे ?

जम्मू और कश्मीर के संसदीय चुनाव के लिए २ लाख हिंदू वयस्क मतदाता है | लेकिन विधानसभा के लिए नही ? क्यों ?

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल| क्यों ?

बंगलादेश में हिंदू लड़किया पीटी जाती है, उनके साथ गैंग रैप किया जाता है | प्रतिदिन मंदिरों को जलने या नष्ट करने कि खबरे पढैते होंगे | क्या हमारे धर्मनिरपेक्षतावादी और मानवाधिकारी कार्यकर्ताओ को इनके लिए आवाज़ नही उठानी चाहिए ? क्या सिर्फ मुसलमानों के लिए ही मानवाधिकार है ?

क्या आप जानते है कि “ इस्लाम राष्ट्रवाद और राष्ट्रिय सीमाओ में विश्वास नही करता है | यह पूरी दुनिया को इस्लाम के तहत दारुल हरब से दारुल इस्लाम तक लाना चाहते है ?”

क्यों मुस्लिम मस्जिद और मदरसे में जाते है न कि स्कूल और कालेज में ? क्या मदरसा भी वैज्ञानिक और इंजिनियर तैयार करता है ? ( सेक्युलर नेताओ द्वारा मुसलमानों को अलग से आरक्षण के लिए अपना सर पिटने के सन्दर्भ में )

मुहर्रम जुलूस हिंदू बाहुल्य क्षेत्रो से लाया जारहा है लेकिन हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम इलाको से अनुमति नही है क्यों ? क्या यह सम्रदायिक बटवारे को स्थायी नही करता है ?

क्या आपको लगता है कि नेहरू परिवार ही एक परिवार है जो आजादी के लिए लड़े या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों क भी थे? जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मदनलाल धींगरा ,वन्शिनाथान, चापेकर ब्रदर्स, वीर सावरकर, राज गुरु, सुभाष चंद्र बोस, उधम सिंह आदि |

मल्लापुरम ( केरल) में , एक डाक्टर ने पाया कि मुस्लिम महिलाओ कि तीन पीढियां बेटी-१३, माँ-२६ और दादी – ३९ सभी गर्भवती है तथा प्रसव के लिए भारती कराया | क्या आप को भी लगता है कि मुसलमानों के लिए परिवार नियोजन अनावश्यक है ?

रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि एक डाकू थे, उसी तरह महाभारत के लेखक वेड व्यास एक मछुवारे थे | दोनों महाकाव्यो और लेखक हिन्दुओ द्वारा प्रतिष्ठित है | क्या अब भी लगता है कि हिंदू धर्म जातिवाद का समर्थन करता है ?

२००२ में कर्नाटक सरकार मंदिरों द्वारा प्राप्त ७२ करोड रुपयों में से ५० करोड मदरसों को, १० करोड चर्च को, १० करोड मंदिरों को दिया गया | मदरसो (आतंकवादी कारखाना ) और चर्चो के विकास के लिए हिन्दुओ का पैसा क्या देना चाहिए ?

जब अफगानिस्तान में तालिबान, बुद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया, तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि यह बाबरी मस्जिदके विध्वंस की प्रतिक्रिया में था. क्या आप टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा के इस औचित्य से सहमत? जैसे को तैसा के लिए ठीक है? तो फिर तुम क्यों गोधरा कांड की प्रतिक्रिया में गुजरात दंगों की आलोचना करते हो ?

पांडिचेरी में एक मुस्लिम को दफनाने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु मुरुगा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया था क्या आप को भी लगता है कि "धर्म एक दूसरे से नफरत नहीं सिखाते हैं"?

१९८९ में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में राजीव गाँधी ने घोषणा की कि “ अगर मिजोरम में कांग्रेस सत्ता में आई तो यहाँ बाईबल के अधर पर शिक्षाए दी जायेगी (?)” यदि यह सांप्रदायिक नही है तो क्या है ?

वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें गिर्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और लेजाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?

यदि ब्रिटेन और अमेरिका( एक धर्म निरपेक्ष देश) में एक से अधिक महिला से शादी करने कि अनुमति नही है तो क्या भारत में एक से अधिक औरतो से शादी करने कि अनुमति देनी चाहिए ?

पोप को भारत कि यात्रा को आमंत्रित किया गया था लेकिन नेपाल के राजा महेंद्र को नागपुर में १९६५ में मकरसंक्रांति समारोह में भाग लेने के लिए अनुमति नही दी गयी थी | क्या यही धर्म निरपेक्षता है ?

अशोक और कनिष्क अफगानिस्तान पर शासन किया. कंधारी जो की दुर्योधन की माँ, कंधार से आया है ( अब अफगानिस्तान में )| क्या आप मानते हैं कि अफगानिस्तान एकबार भारत का अभिन्न हिस्सा था?

त्रिपुरा में बैप्टिस्ट चर्च को न्यूजीलैंड से 60 साल पहले मिशनरियों द्वारा स्थापित किया गया था| क्या आपको लगता है कि चर्च राष्ट्रवाद को बढ़ावा देंगे?

पाकिस्तान में छात्रों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि हिंदु हमारे दुश्मन हैं, हिंदू से मित्रता कभी नहीं किया जा सकता है काफिरो (हिंदुओं) को मार देना चाहिए. क्या आप को अब भी लगता है कि दोस्ती पाकिस्तान के साथ संभव है?

पाकिस्तान इस्लामी देश है,बायीं-पास सर्जरी या कैंसर के इलाज के लिए भारत आते है | पाकिस्तान कैसा एक देश है जिसके पास परमाणु विकशित करने की क्षमता है लेकिन एक अच्छे अस्पताल कि नही ?इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सिर्फ ट्रिगर से खुश है विकास और स्वास्थ्य सीवाओ की कीमत पर |

कम्युनिस्ट नेता स्टालिन की बेटी, स्वेतलाना, दिनेश सिंह के भाई से शादी करने के लिए और भारत में बसने की कामना की| हमारे साम्यवादियों और इंदिरा गांधी ने इस का विरोध किया | वे अब कैसे एक इतालवी महिला का समर्थन करे ?

जब योगा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक करोड़ों डॉलर का उद्योग है, हमारी सरकार क्यों अंधी बन गयी है इस तकनीक मानवविकास के लिए ? क्या इसलिए कि यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है ?

पूजा में 'संकल्प' "भारत वर्षे , भारत कंडे......... के साथ शुरू होता है ...". ये क्या हैं? क्या आप को अभी भी लगता है कि अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद अलग कर रहे हैं ? ये राष्ट्र की दो आंखें है?

अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद भारत में अविभाज्य हैं.क्या आपको नहीं लगता कि अध्यात्मवाद के बिना भारत बिना आत्मा के एक शरीर की तरह हो जाएगा?

हिंदू धर्म में आप को सुधारको कि संख्या बहुत मिल जायेगी | अन्य धर्मो में क्यों नही पाई जाती है ? क्या इन्हें सुधारने कि जरुरत नही है कि सुधारे हुए है ?

स्वामी विवेकानन्द के नजर में इस्लाम ( swami VivekaNand about Islam ) - 3

दूसरे पोस्ट से आगे...
९. किसी मुस्लिम देश में मंदिर बनाना वर्जित – “ ऐसा भारत में ही है कि यहाँ भारतीय ( हिंदू) मुसलमानों, ईसाईयों के लिए पूजा स्थल ( मस्जिद, गिरजाघर) बनवाते है, अन्यत्र कही नही | अगर आप एनी देशो में जाओ और मुसलमानों या एनी मतों के लोगो से कहो कि उन्हें अपने लिए मंदिर बनाने दो तो देखो वे तुम्हारी किस प्रकार मदद करते है, अनुमति देने कि जगह वे तुम्हे और तुम्हारे मंदिर को ही तोड़ डालने कि कोशिश करेंगे, यदि वे ऐसा कर सके |” ( ३:१४४)
१०. भारत में रहने वाले भी हिंदू – “ इसलिए यह शब्द ( हिंदू ) न केवल वास्तविक हिन्दुओ बल्कि मुसलमानों, ईसाईयों, जैनियों और एनी लोगो के लिए भी यही है, जो कि भारत में रहते है |” ( ३:११८ )
११. सैकड़ो वर्षों तक ‘अल्लाह–हो-अकबर’ गूंजता रहा – “बर्बर विदेशी आक्रान्ताओ की एक लहर के बाद दूसरी लहर इस हमारे पवित्र देश पर टकराती रही | वर्षों तक आकाश अल्लाह-हो-अकबर के नारों से गुंजायमान होता रहा और कोई हिंदू नही जानता था कि इसका अंतिम ‌‍‌क्षण कौन सा होगा| विश्व भर के ऐतिहासिक देशो मेसे भारत ने ही सबसे अधिक यातनाये और अपमान सहे है फिर भी हम लगभग उसी एक राष्ट्र के रूप में विद्यमान है और यदि आवश्यक हुआ तो सभी प्रकार कि आपदाओ को बार – बार सामना करने के लिए तैयार है | इतना ही नही, अभी हाल में ऐसे भी संकेत है कि हम ना केवल बलवान  ही है बल्कि बाहर निकालने को तैयार है क्योकि जीवन का अर्थ प्रसार है |” ( ३:३६९-७० )
१२. मुसलमानों को तरह न मानाने पर हत्या - “ अज्ञानी लोग ...... एनी किसी देसरे मनुष्य माकी समस्यायों का अपने स्वतंत्र चिंतन के अनुसार व्याख्या न करने देने को न केवल मना करते है, बल्कि यहाँ तक कहने साहस करते है कि एनी सभी विल्कुल गलत है और केवल वही सही है | यदि ऐसे लोगो का विरोध किया जाता है तो वे लड़ने लगते है और यहाँ तक कहते है कि वे उस आदमी को मार देंगे यदि वह ऐसा विश्वास नही करता है जैसा कि वे स्वयं करते है |” ( ४:५२ )
१३. पैगम्बर व् फरिस्तो कि पूजने में आपत्ति नहीं – “ मुसलमान प्रारंभ से ही मूर्ति पूजा के विरोधी रहे है लेकिनुन्हे पैगम्बरों या उनके सन्देश वाहको को पूजने या उनके प्रति आदर प्रकट करने में कोई आपत्ति नही होती है, बल्कि वास्तविक व्यवहार में एक पैगम्बर कि जगह हजारों ही हजार पीरों कि पूजा की जारही है | “ ( ४:१२१ )
१४. मुसलमान सर्वाधिक संप्रदायवादी –इस ( इस्लाम ) के विषय में आज मुसलमान सबसे अधिक निर्दयी और सम्प्रदायवादी है उनका मुख्य सिध्दांत वाक्य है “ ईश्वर (अल्लाह) एक है और मुहम्मद उसका पैगम्बर है |” इसके अलावा सभी बाते न केवल बुरी है, बल्कि उन्हें फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए | प्रतेक स्त्री और पुरुष, जो इन सिध्दांत को पूरी तरह नही मानता है, उसे क्षण भर के चेतावनी के बाद मार देना चाहिए, प्रतेक वास्तु जो इस प्रकार की पूजा विधि के अनुकूल नहीं है, उसे फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए और प्रतेक पुस्तक जो इसके अलावा क्स्किस और बातों की शिक्षा देती है, उसे जला देना चाहिए | पिछले पांच सौ वर्षों में प्रशांत महासागर से लेकर आंध महासागर तक सारे विश्व में लगातार रक्तपात होता रहा है | यह है मुहम्मद्वाद ! फिर भी इन मुसलमानों में से ही, जहां कही कोई दार्शनिक व्यक्ति हुआ, उसने निश्चय ही इन अत्याचारों कि निंदा कि है |” ( ३ फरवरी १९००, कोपासडेना में दिए गए भाषण से, ४:१२६ )
१५. अल्लाह के लिए लड़ो – “ भारत में विदेशी आक्रान्ताओ की, सैकड़ो वर्षों तक लगातार, एक के बाद एक लहर आती रही और भारत को तोडती और नष्ट भ्रष्ट्र करती रही | यहाँ तलवारे चमकी और ‘ अल्लाह के लिए लड़ो और जीतो “ के नारों से भारत का आकाश जुन्जता रहा | लेकिन ये बाढ़े भारत के आदर्शो को बिना परिवर्तित किये हुए, स्वत: ही धीरे – धीरे समाप्त होती गयी |” ( ४:१५९ )
१६. मूर्ति पूजक हिंदू घृणास्पद – “ मुसलमानों के लिए यहूदी और ईसाई अत्यंत घृणा के पात्र नही है | उनकी नजरो में वे कम से कम ईमान के आदमी तो है | लेकिन ऐसा हिंदू के साथ नही हयाई | उनके अनुसार हिंदू मूर्ति पूजक है व् घृणास्पद ‘ काफ़िर’ है | इसलिए वह इस जीवन में नृशंस हत्या के योग्य है और मरने के बाद उसके लिए शाश्वत नरक तैयार है | मुसलमान सुलतानो ने काफिरो के अध्यात्मिक गुरुओ और पुजारियों के साथ यदि कोई सबसे अधिक कृपा की तो यह कि उन्हें किसी प्रकार अंतिम सांस लेने तक चुपचाप जी लेने के अनुमति दे दी | यह भी कभी कभी बड़ी दयालुता मानी गयी, यदि किसी मुस्लिम सुल्तान का धार्मिक जोश असामान्य या कुछ अधिक होता है तो ‘ काफिरो’ के कत्ले आम रूपी बड़े यग्य का फ़ौरन ही प्रबंध किया जाता है |” (४: ४४६ )
१७. यह कत्ले आम मुसलमान लाए – “ तुम जानते हो कि हिंदू धर्म किसी को यातना नही देता | यह एक ऐसा देश है जहां कि सभी प्रकार के सम्प्रदाय शांति और सौहार्द् के साथ रह सकते है | मुसलमान अपने साथ अत्याचार और कत्ले आम लाये, लेकिन उनके आने से पहले तक यहाँ शांति बनी रहती थी |” ( ५:१९० )
१८. मुसलमानों ने तलवार का सहारा लिया – “ भारत में मुसलमान ही ऐसे पहले लोग थे, जिन्होंने तलवार का सहारा लिए | “ ( ५:१९७ )
१९. एक हिंदू का कम होने का मतलब एक शत्रु का बढ़ना – “ सबसे पुराने इतिहासकार फरिश्ता के अनुसार हमें बताया गया है कि जब सबसे पहले मुसलमान भारत में आये तो यह साठ करोंड़ हिंदू थे और अब केवल बीस करोंड़ है ( यानी चालीस करोंड़ हिंदू मारे गए और धर्मान्तरित किये गए ) | और हिंदू धर्म से एक भी हिंदू का बाहर जाने का मतलब है एक हिंदू का कम होना नहीं है बल्कि एक दुश्मन का बढ़ जाना है” इसके अलावा इस्लाम और ईसाईयत में धर्मान्तरित अधिकांश हिंदू तो तलवार के बल पर धर्मान्तरित हुए है या उनके संताने है |

“ ( ५:२३३ )

२०. मुहम्मदीय विजय को भारत में पीछे हटाना पड़ा – “ मुसलमानों के विजय कि लहर जिसने सारी पृथ्वी को निगल लिया था, उसे भारत के सामने पीछे हटाना पड़ा | “ ( ५:५२८ ) 
२१. हशासिन शब्द ‘असेसिन‘ बन गया – मुसलमानों का ‘ हशासिन ‘ शब्द ‘ असेसिन् ‘ बन गया क्योकि मुहम्मदीय मत का एक पुराना सम्प्रदाय गैर- मुसलमानों को मारने को अपने धर्म का एक अंग मनाता था |” ( ५:४० )
२२. इस्लाम में हिंसा का प्रयोग – “ मुसलमानों ने हिन्द का सबसे अधिक प्रयोग किया | “ ( ७:२१७ )
२३. गैर मुसलमानों को मार दो – “ एक ऐसा रिलीजन भी हो सकता है जो अत्यंत भयंकर शिक्षाये देता हो | उदाहरण के लिए मुसम्मादीय मत ( इस्लाम ) मुसलमानों को उन सबकी हत्या करने कि अनुमति देता है जो कि उसके मतानुयायी नही है | ऐसा कुरान में स्पष्ट लिखा है कि “ अविश्वाशियो ( गैर-मुसलमानों ) को मार दें | यदि वे मुहम्मादीय ( मुसलमान ) नही हो जाते है |” उन्हें अग्नि में झोक देना और तलवार से काट देना चाहिए |”
अब यदि हम किसी मुसलमान से कहे कि ऐसा गलत है तो, वह स्वाभाविक तौर पर फ़ौरन पूछेगा कि “ तुम ऐसा कैसे जानते है ? तुम कैसे जानते ही कि ऐसा ठीक नही है ? मेरी धर्म पुस्तक ( कुरान ) कहती है कि ऐसा ही ठीक है | “ ( १७ नवंबर १८९९ को लन्दन में दिए गए भाषण में , प्रैक्टिकल वेदांत, भाग ३ से )
( समस्त उध्दरण अंग्रेजी के सम्पूर्ण विवेकनन्द वाद्रिमय के हिंदी अनुबाद से है, खंड एवं पृष्ठानुसार )

स्वामी विवेका नन्द के नजर में इस्लाम ( swami Viveka Nand about Islam ) - २



४. गैर मुसलमानों कि हत्या :-

“ कोई आदमी जितना अधिक स्वार्थी होता है वह उतना ही अधिक अनैतिक होता है इसी प्रकार जो जाति केवल अपने ही स्वार्थ में लिप्त रहती है, वह सारे विश्व में सबसे अधिक निर्धायी और सबसे अधिक अत्याचारी होता है | ऐसा कोई रिलीजन नहीं हुआ है जो उपरोक्त द्वेशवद से अधिक चिपका हुआ हो जितना कि अरेबियन के पैगम्बर ( मुहम्मद) द्वारा स्थापित रिलीजन “इस्लाम” और अन्य कोई ऐसा रिलीजन ऐसा नहीं है जिसने इतना खून बहाए और जो एनी लोगो के प्रति इतना अत्याचारी रह हो | कुरान में एक उपदेश है “जो कि मनुष्य इन शिक्षाओ को नही मानता है, उसे मार देना चाहिए, उसे मारना एक दयालुता है “ | इस्लाम में स्वर्ग ( जन्नत), जहां कि अत्यंत सुन्दर ‘हूरें’ और अन्य सभी प्रकार के इन्द्रिय सुखो एवं अमोद – प्रमोद के साधन है, को पाने का सबसे पक्का तरीका “ गैर – मुसलमानों को मार देने के द्वारा है “ जरा इस रक्तपात के बारे में सोचो जो कि इस प्रकार के विश्वासों के परिणामस्वरूप हुए है |”
( १८ नव. १८९६ को लन्दन में दिए गए भाषण से, २०:३५२-५३)


५. एक हाथ में कुरान दूसरे में तलवार :-
“ जरा उन छोटे – छोटे संप्रदायों के बारे में सोचो जो पिछले कुछ सैकड़ो वर्षों से चलायमान मानव मस्तिष्क से उपजे है और वो ईश्वर के समीप अगणित सत्यों के ज्ञान का हेकडबाजी से दावा करते है |
इस मिथ्याभियान् पर जरा ध्यान दीजिए | इससे यही सिद्ध होता है तो यही कि ये लोग कितने अहंकारी है | और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि ऐसे दावे हमेशा झूठे सवित होते है
और ईश्वर के कृपा से ऐसे दावों का सदैव असत्य होना निश्चित है | इस विषय ( इस्लाम ) में मुसलमान सबसे अलग थे |उन्होंने आगे बढ़ाने का प्रतेक कदम तलवार कि धार से आगे बढ़ाया यानी कि एक हाथ में कुरान और दूसरे में तलवार, “ कुरान स्वीकार करो या मौत” इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है “ तुम इतिहाश से जानते हो कि इससे उनकी कितनी आश्चर्यजनक सफलता रही है| छह सौ वर्षों तक उन्हें कोई नहीं रोक सका और इसके बाद एक समय ऐसा आया जब उन्हें चिल्ला कर कहना पड़ा कि रुको | अन्य रिलिजनो के साथ भी ऐसा ही होगा, यदि वे ऐसे ही तरीके अपनाएंगे |
( २८ जन. १९००, पाड्सेना कैलिफोर्निया में दिए गए भाषण से, ‘ १: ६९*७०)


६. सार्वभौमिक भाईचारा सिर्फ मुसलमानों के लिए :
“मुस्लमान विश्व व्यापी चयिचारे कि बात करते है परन्तु वास्तव में इसका मतलब क्या है ? आखिर जोकि मुसलमान नहीं है वह इस सार्वभौमिक भाईचारे में सम्मिलित क्यों नहीं किया जायेगा ? उसके तो गले काटे जाने कि संभावना अधिक है |” ( २:३८०)

७. मुसलमान मूर्तियों कि जगह कब्रों को पूजते है :-
“ मुसलमान प्राय: मूर्तियों कि जगह अपने पीरों और शहीदों कि कब्रों का उपयोग करते है ( यानी पूजते है )|” ( ३: ६१)

८. बालक रूप में ईश्वर :
“ मुसलमान द्वारा ईश्वर को एक बच्चे के रूप में होने के विचार को स्वीकार करना असंभव है | वे इसे मानाने से यह भय्संहित संकोच करेंगे | लेकिन ईसाई और हिंदू इसे आसानी से अनुभव कर सकते है | क्योकि उनके मत में बाल स्वरुप जीसस और बाल रूप श्री कृष्ण कि अवधारण है “| ( ३:९६)

शेष अगले पोस्ट में ....

आतंकवाद का कारण है इस्लाम



जो मुसलमान कहते हैं इस्लाम तो शांति का मजहब है वे यह बताए कि जब सारी दुनिया के मुसलमान इन बातों पर सहमत हैं कि इस्लाम ही एकमात्र सच्चा धर्म है http://www.islamhouse.com/p/289311 तो शांति कैसे आ सकती है ? अब वे यह बात क्यों कहते हैं या तो वे इस्लाम के मूल सिद्धान्त को नहीं जानते या फिर वे हिन्दुऒं को मूर्ख बनाने के लिए एसा कहते हैं । अन्य धर्मावलम्बयों को इस्लाम की शांति समझाने से पहले वे स्वयं आपस में एकमत हो जाएं । भारत के मुसलमानों को इस फतवे का जवाब देना होगा व यदि नहीं देते तो फतवे को ठीक मानकर हिन्दुऒं को जिहाद का जवाब देने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । यह फतवा सभी सेक्यूलर कहलाने वाले नेताऒं के मुंह पर तमाचा है । इसे पढ़ने के बाद वे किस मुंह से इस्लाम की तरफदारी करेंगे? हिन्दुओं की मूल समस्या यह है कि वे जैसे स्वयं हैं इस्लाम व ईसाइयत को भी उसी श्रेणी में रखते हैं और इसी कारण वे आज तक इसलाम के हाथों मार खाते रहे हैं । :
उक्त फतवे से यह स्पष्ट हो गया है कि मुसलमान किसी भी देश में अन्य धर्मावलम्बियों के साथ नहीं रह सकते हैं । सऊदी आरब की साइट इस्लाम हाउस में एक फत्वा इसी विषय पर लिया गया है । विषय है

‘‘ क्या अन्य धर्मों की इस्लाम के साथ एकता स्थापित की जा सकती है ।”

इस फतवे को पढ़कर समस्त देशवासी जवाब दें कि क्या इस्लाम व मुसलमानों से कुरआन व शरीयत में एसी खतरनाक बातों के रहते विश्वास किया जा सकता है ? मुसलमान जवाब दें कि इनमें कौन सी बात वे भारत के मदरसों में नहीं पढ़ाते हैं ? क्या उन्होंने कुरआन व हदीस को संशोधित करके पढ़ाना शुरू कर दिया है ?यदि नहीं तो वे हिन्दुऒं के किसी भी प्रतिकार पर शोर मचाना बंद कर दें क्योंकि यह संविधान

सावधान ! भारत का इस्लामीकरण हो रहा है ?


हमरे देश कि राजनीती इतनी गिरे हुए स्तर तक पहुच गयी है कि दुनिया के देशों में सर्च लाईट लेकर भी खोजा जाय तो भी नही मिलेगा | जहाँ पर आम जनता को अपनी अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ने को मजबूर किया जा रहा है, वही दूसरी तरफ देश कि एक बड़ी राजनीतीक पार्टी समाज के एक वर्ग के तुष्टिकरण में लगी हुई है |
·       क्या होगा हमारे देश का ? ये भविष्य के अंधकार में खोया हुआ है ! अगर हम उस भविष्य के अँधेरे में कुछ देखने की कोशिश करते है तो, आज से एक अलग भारतीय समाज की धुधली झलक नजर आ रही है | जहाँ भारत के बहुत से राज्यों का मुस्लिमकरण हो गया है, सरकारी इमारतों पर पाकिस्तानी जैसे झंडे लहरा रहे है | आज के तथाकथित सेक्युलर नेता इस्लाम धर्म अपना कर अपने – अपने हरम में जन्नत का आनंद ले रहे है | और बचे हुए कुछ राज्यों में ये सेक्युलर नेता खून की होली खेलवा रहे है | पकिस्तान जिंदाबाद – पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा कर जन्नत की सीढियाँ चढ रहे है | आम जनता भी अपनी आत्म सम्मान की रक्षा करने के लिए जान की बाजी लगा रही है | शेष भारत के गलियों मुहल्लो में भोपू बजवा कर आम जनता को सन्देश दे रहे है कि “ हमें भी मुस्लिम बन कर, शेष भारत का इस्लामीकरण कर देना चाहिए | क्योकि अल्लाह बहुत दयालु है |
आखिर कहा खो गयी है हमारे देश कि राजनीति ? हमारे देश के नेता धर्म के नाम पर देश को बाट रहे है| प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कि ही बात लीजिए, इन्हें तो सच्चे, ईमानदार नेता कहते है लोग, मगर ये भी तुष्टिकरण कि राजनीती में लगे पड़े है | इनका ये वाक्य कि “ हमारे देश के संशाधनो पर पहला हक मुसलमानों का है “| मै कहता हूँ कि “क्या हिंदू, सिख, ईसाई, फारसी, जैन, बौद्ध क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खेतों में जाकर घास छिलेंगे और मुसलमान सब संशाधनों का पहले उपयोग करेंगे| अगर मुसलमानों से कुछ संशाधन बचा तो मनमोहन सिंह के कृपा से शेष धर्मों के लोग उपयोग करेंगे| लानत है ऐसे मनमोहन सिंह पर जो कुर्सी के लालच में अपना आत्म सम्मान  तक इटली के राजकुमारी के आगे गिरवी रखा दिया | इसकी तुलना एक निरीह जानवर से भी कि जाय तो कम है जो अपनी आत्म सम्मान के लिए जान कि बाजी तो लगा देता है | मनमोहन सिंह एक सच्चे, ईमानदारी का तमगा लिए है मगर उनके पास आत्म -सम्मान नाम कि कोई चीज ही नही है | अगर जरा भी आत्म सम्मान होता तो ऐसे वाक्य बोलने से पहले सौ बार मर चुके होते, फिर भी ये वाक्य जुबान से बाहर नही निकलती |
एक सच्चे, ईमानदार प्रधानमंत्री कि गैर लोकतांत्रिक बयांन से क्या समझा जाय ? अगर ये वाक्य कांग्रेस का कोई लुच्चा नेता ( दिग्विजय सिंह ) कहा होता तो आम जनता लुच्चे की लुच्चई समझ कर सुन लेती | मगर यह वाक्य हमारे देश के प्रधानमंत्री जी बोले है तो कुछ न कुछ तो सोचना ही पड़ेगा ? कि दाल में काला है कि पूरी दाल ही काली है ?
जरा ध्यान से सोचा जाय तो ! मनमोहन सिंह ने ऐसा वयान क्यों दिया है ? मुस्लिमो को खुश करने के लिए ? अगर मुस्लिम खुश हो जाते है तो क्या होगा ? सच्चाई है कि कांग्रेस का वोट बैंक बढेगा | इससे कांग्रेस को फिर से कुर्सी मिलेगी, कांग्रेस फिर से सत्ता में आजायेगी (?) | अब मनमोहन सिंह (चाहते हुए भी अब प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे ) काश्मीर को मुस्लिम देश बनाने के लिए कहेंगे कि “ कश्मीर के मुसलमानों ने बहुत संघर्ष किये है | ६०००० हिन्दु पंडितो से पाकिस्तान कि सहायता से कश्मीर को खाली करने में बहुत मेहनत किये है, हिंदूओ के खून से कश्मीर कि घाटी को लाल रंगीन बनाया है, कितना मेहनत किया है मुस्लिम बेचारो ने | इन्हें इनकी बहादुरी पर बतौर कश्मीर को इस्लाम देश घोषित कर ही देना चाहिए | ताकि राहुल गाँधी से लेकर गाँधी परिवार के आने वाले वारिसों को कम से कम सात – आठ पुस्तो तक मुसलमानों का वोट मिलता रहे और भारत कि गद्दी पर बिराजमान रहे, जैसे जवाहरलाल नेहरू ने किये थे कश्मीर में धारा ३७० का प्रावधान करके |
शेष अगले पोस्ट में ..........

विश्व में हिन्दू देश एक अथवा दो नहीं वरन १३

जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहीं जानते । इसके लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हिन्दू की परिभाषा क्या है ।
हिन्दुत्व की जड़ें किसी एक पैगम्बर पर टिकी न होकर सत्य, अहिंसा सहिष्णुता, ब्रह्मचर्य , करूणा पर टिकी हैं । हिन्दू विधि के अनुसार हिन्दू की परिभाषा नकारात्मक है परिभाषा है जो ईसाई मुसलमान व यहूदी नहीं है वे सब हिन्दू है। इसमें आर्यसमाजी, सनातनी, जैन सिख बौद्ध इत्यादि सभी लोग आ जाते हैं । एवं भारतीय मूल के सभी सम्प्रदाय पुर्नजन्म में विश्वास करते हैं और मानते हैं कि व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही उसे अगला जन्म मिलता है । तुलसीदास जीने लिखा है परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा सम नहीं अधमाई । अर्थात दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है । कोई व्यक्ति किसी भी भगवान को मानते हुए, एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है । हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता । यही कारण है कि भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख बौद्ध जैन आर्यसमाजी सनातनी इत्यादि आते हैं । हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार सामान्य माना जाता है । एवं एक दूसरे के धार्मिक स्थलों को लेकर कोई झगड़ा अथवा द्वेष की भावना नहीं है । सभी पंथ एक दूसरे के पूजा स्थलों पर आदर के साथ जाते हैं । जैसे स्वर्ण मंदिर में सामान्य हिन्दू भी बड़ी संख्या में जाते हैं तो जैन मंदिरों में भी हिन्दुओं को बड़ी आसानी से देखा जा सकता है । जब गुरू तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितो के बलात धर्म परिवर्तन के विरूद्ध अपना बलिदान दिया तो गुरू गोविन्द सिंह ने इसे तिलक व जनेउ के लिए उन्होंने बलिदान दिया इस प्रकार कहा । इसी प्रकार हिन्दुओं ने भगवान बुद्ध को अपना 9वां अवतार मानकर अपना भगवान मान लिया है । एवं भगवान बुद्ध की ध्यान विधि विपश्यना को करने वाले अधिकतम लोग आज हिन्दू ही हैं एवं बुद्ध की शरण लेने के बाद भी अपने अपने घरों में आकर अपने हिन्दू रीतिरिवाजों को मानते हैं । इस प्रकार भारत में फैले हुए पंथों को किसी भी प्रकार से विभक्त नहीं किया जा सकता एवं सभी मिलकर अहिंसा करूणा मैत्री सद्भावना ब्रह्मचर्य को ही पुष्ट करते हैं ।
इसी कारण कोई व्यक्ति चाहे वह राम को माने या कृष्ण को बुद्ध को या महावीर को अथवा गोविन्द सिंह को परंतु यदि अहिंसा, करूणा मैत्री सद्भावना ब्रह्मचर्य, पुर्नजन्म, अस्तेय, सत्य को मानता है तो हिन्दू ही है । इसी कारण जब पूरे विश्व में 13 देश हिन्दू देशों की श्रेणी में आएगें । इनमें वे सब देश है जहाँ बौद्ध पंथ है । भगवान बुद्ध द्वारा अन्य किसी पंथ को नहीं चलाया गया उनके द्वारा कहे गए समस्त साहित्य में कहीं भी बौद्ध शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है । उन्होंने सदैव इस धर्म कहा । भगवान बुद्ध ने किसी भी नए सम्प्रदाय को नहीं चलाया उन्होनें केवल मनुष्य के अंदर श्रेष्ठ गुणों को लाने उन्हें पुष्ट करने के लिए ध्यान की पुरातन विधि विपश्यना दी जो भारत की ध्यान विधियों में से एक है जो उनसे पहले सम्यक सम्बुद्ध भगवान दीपंकर ने भी हजारों वर्ष पूर्व विश्व को दी थी । एवं भगवान दीपंकर से भी पूर्व न जाने कितने सम्यंक सम्बुद्धों द्वारा यही ध्यान की विधि विपश्यना सारे संसार को समय समय पर दी गयी ( एसा स्वयं भगवान बुद्ध द्वारा कहा गया है । भगवान बुद्ध ने कोई नया पंथ नहीं चलाया वरन् उन्होंने मानवीय गुणों को अपने अंदर बढ़ाने के लिए अनार्य से आर्य बनने के लिए ध्यान की विधि विपश्यना दी जिससे करते हुए कोई भी अपने पुराने पंथ को मानते हुए रह सकता है । परंतु विधि के लुप्त होने के बाद विपश्यना करने वाले लोगों के वंशजो ने अपना नया पंथ बना लिया । परतुं यह बात विशेष है कि इस ध्यान की विधि के कारण ही भारतीय संस्कृति का फैलाव विश्व के 21 से भी अधिक देशों में हो गया एवं ११ देशों में बौद्धों की जनसंख्या अधिकता में हैं ।
हिन्दुत्व व बौद्ध मत में समानताएं -
१- दोनों ही कर्म में पूरी तरह विश्वास रखते हैं । दोनों ही मानते हैं कि अपने ही कर्मों के आधार पर मनुष्य को अगला जन्म मिलता है ।
2- दोनों पुर्नजन्म में विश्वास रखते हैं ।
3- दोनों में ही सभी जीवधारियों के प्रति करूणा व अहिंसा के लिए कहा गया है ।
4- दोनों में विभिन्न प्रकार के स्वर्ग व नरक को बताया गया है ।
5- दोनों ही भारतीय हैं भगवान बुद्ध ने भी एक हिन्दू सूर्यवंशी राजा के यहां पर जन्म लिया था इनके वंशज शाक्य कहलाते थे । स्वयं भगवान बुद्ध ने तिपिटक में कहा है कि उनका ही पूर्व जन्म राम के रूप में हुआ था ।
6- दोनों में ही सन्यास को महत्व दिया गया है । सन्यास लेकर साधना करन को वरीयता प्रदान की गयी है ।
7- बुद्ध धर्म में तृष्णा को सभी दुखों का मूल माना है । चार आर्य सत्य माने गए हैं ।
- संसार में दुख है
- दुख का कारण है
- कारण है तृष्णा
- तृष्णा से मुक्ति का उपाय है आर्य अष्टांगिक मार्ग । अर्थात वह मार्ग जो अनार्य को आर्य बना दे ।
इससे हिन्दुओं को भी कोई वैचारिक मतभेद नहीं है ।
8- दोनों में ही मोक्ष ( निर्वाण )को अंतिम लक्ष्य माना गया है एवं मोक्ष प्राप्त करने के लिए पुरूषार्थ करने को श्रेष्ठ माना गया है ।
दोनों ही पंथों का सूक्ष्मता के साथ तुलना करने के पश्चात यह निष्कर्ष बड़ी ही आसानी से निकलता है कि दोनों के मूल में अहिंसा, करूणा, ब्रह्मचर्य एवं सत्य है । दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता । और हिन्दओं का केवल एक देश नहीं बल्कि 13 देश हैं ।
इस प्रकार हम देखते हैं विश्व की कुल जनसंख्या में भारतीय मूल के धर्मों की संख्या 20 प्रतिशत है जो मुस्लिम से केवल एक प्रतिशत कम हैं । एवं हिन्दुओं की कुल जनसंख्या बौद्धों को जोड़कर 130 करोड़ है। है जो मुसलमानों से कुछ ही कम है । व हिन्दुओं के 13 देश थाईलैण्ड, कम्बोडिया म्यांमार, भूटान, श्रीलंका, तिब्बत, लाओस वियतनाम, जापान, मकाउ, ताईवान नेपाल व भारत हैं । इसी कारण जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहीं जानते हैं । 

अल्लाह हमें रोने दो - एक मुस्लिम औरत की व्यथा ( स्वयं उसी के शब्दों में ) ;- लेखिका - जहांआरा बेगम

ओ अल्लाह तुम तो हमें अकेले में चीखने दो और जोर जोर से रोने दो । कहीं एकान्त में हमारा दम ही न निकल जाए । बुरके की घुटन में लोक जीवन की चारदीवारी में हमें इतना जी भर के रो लेने दो कि हमारी आखों में एक भी आंसू बाकी न बचे । हमें इतना रोने दो कि उसके बाद रोने की ताकत ही न रहे । क्यों केवल एक ही अधिकार तुमने मुसलमान महिलाओं के लिए छोड़ा है । पूरे मुस्लिम संसार में उलट पुलट हो रहे हैं पर हम मुसलमान तो वही पुराने ढर्रे पुराने संस्कारों की बेड़ियों में जकड़े हुएहैं । पूरे संसार की नारियों के लिए मुक्ति आंदोलन चले और आज वह स्वतंत्रता के मुक्त वातावरण में सांस ले रही हैं । परन्तु वाह रे हमारा भाग्य! मुस्लिम समाज की महिलाओं की मुक्ति का एक भी स्वप्न संसार के किसी कोने से नहीं फूटा । हमारी मुक्ति के लिए कोई भी समाज सुधारक, चिन्तक, कोई नेता व कोई भी धार्मिक व्यक्ति आगे नहीं आया । या अल्लाह ! कितना अदभुत है हमारा मुस्लिम समाज जिसमें कोई शरत चन्द्र पैदा नहीं हुआ जो हमारे आसुंओं का हिसाब चुकता कर दे । बदरूद्दीन तैयबजी, हमीद दलवई आदि प्रसिद्ध विद्वानों ने गो हत्या बंद हो इस पक्ष में निबंध लिखे परन्तु हमारे लिए सहानुभूति का एक भी अक्षर हलक से नहीं फूटा । अब्दुल जब्बार ने हिजड़ों के दुख के बारे में तो एक मोटी पुस्तक लिख डाली परन्तु हमारे लिए एक भी शब्द उनके शब्दकोष से नहीं फूटा । सैय्यद मुस्तफा सिराज ने तो लिख ही डाला कि हिन्दू समाज अपने लोगों के दोषों और त्रुटियों को लेकर स्वतंत्रता पूर्वक लिख सकते हैं परन्तु हम लोग अपने समाज के बारे में लिखने से डरते हैं । हमारे विचारक भी मुस्लिम मुल्ला , मौलवियों से डरे हुए , सहमें हुए से एक शब्द भी नहीं कह पाते । खासतौर से एक मुस्लिम विवाह कानून को लेकर अगर कुछ ने लिखना भी शुरु कर दिया जैसे कि नरगिस सत्तार साहब की हमें आषा की एक किरण फूटती सी दिखाई तो दी पर अफसोस ! उसके वाद फिर वही घोर अंधकार , गहरी काली स्याही व एक लंबी चुप्पी । पिछले कई सालों से संसार के कई हिस्सों में कई परिवर्तन हुए । विवाह कानून में कई तब्दीलियां हुई कई नई वैज्ञानिक खोजों और चिन्तनों ने पुराने रूढ़ियों को छोड़ने को मजबूर कर दिया लेकिन मुस्लिम समाज वही पुरानी रूढ़िवादियों मे अटका हुआ है । लाहौर में सहस्रों स्त्रियों महिला कानून विदों ने जब मुस्लिम महिलाऒं के अधिकारों को लेकर जुलूस निकाला तो पुरूष पुलिस ने भयंकर लाठी चार्ज करके उसे भंग कर दिया । एक बार भारत की पारलियामैन्ट में मुस्लिम महिलाऒं के अधिकारों को लेकर डीबेट रखी गयी। ए डी एम के की पार्टी के मुस्लिम सांसदों द्वारा इस प्रश्न को उठाया गया पर मुस्लिम वोट खो देने के भय से देश की सब राजनैतिक पार्टियों को सांप सूंघ गया । सबके सब गूगें बहरे हो गए । क्या अजीब जीव है अल्लाह ? यह राजनैतिक पार्टी के नेता व कार्यकर्ता । ऐसा लगता है जैसे इन सबकी जुबान को लकवा मार गया हो । 

ओ अल्लाह ! यह राजनैतिक पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता सुल्तानों के बनाए हुए खोजीयों हिजड़ों से भी नीच व निकृष्ट जीव हैं । खोजी लोग वह होते थे जो सुल्तानों द्वारा उनकी काम वासनाओं को पूरा करने के लिए सुन्दर स्त्रियों के बीच रहते हुए भी उनका भोग नहीं कर सकते थे । उन सुंदर स्त्रियों को देख कर वह मजबूरी में मन मसोस कर रह जाते थे क्योंकि हरम की स्त्रियों को बुरी नजर से देखना उनकी मौत का न्यौता देने के बराबर होता था । ऐसे ही आज के नेता केवल दिखावे के लिए समाज सुधारक बनते थे अन्दर से उनकी निगाहें स्त्रियों के बदन को निहारती रहती है । यदि वे मुस्लिम स्त्रियों कि उत्थान की बात भी करते हैं तो केवल छलावा मात्र होता है । करके दिखाने की शक्ति उनमें नाम मात्र की भी नहीं होती है । इसलिए आज मुस्लिम स्त्रियों का आकुल क्रंदन चालू है । और शायद युगयुगान्तर तक रहेगा । यह राजनैतिक तुच्छ जीव ऊंची आवाज में मधुर मधुर सुन्दर महान शब्दों मे स्वाधीनता , साम्यता व समान अधिकारों जैसे शब्दों का प्रयोग तो करते हैं परन्तु वह वोटों के लालची मुस्लिम स्त्रियों के उत्थान में एक एक भी पग नहीं उठाते । वाह कितनी सुन्दर शब्दावली का प्रयोग करते हैं मानों आज ही मुस्लिम स्त्री समाज की नैया पार लगा देगें । परन्तु उनके भाग्य में तो आंसू के दरिया में डूबना ही लिखा है । आंसू ही उनका भाग्य है जैसे संसार का तीन हिस्सा पानी है और एक हिस्सा पृथ्वी है ऐसा ही मुस्लिम समाज की महिलाओं का जीवन गर्दन तक आंसुओं में डूबा है । हिम्मत तो देखिए पुरूष समाज का ८० वर्ष का शेख कांपते हुए सिर वाला डगमगाते हुए कदमों वाला घर में ५ बीबियां होते हुए भी भारत में आ रहा है केवल १३, १४ वर्ष की लड़की से विवाह रचाने और वह लाचार लड़की पुरुषों द्वारा संचालित समाज में न चाहते हुए भी बूढ़े खूंसट के साथ अरब देश में पहुंच जाती है । इस प्रकार की दिल दहला देने वाली घटनाओं । आए दिन समाचार पत्रों में पढ़कर मुस्लिम महिलाओं की रूह कांप जाती है पर बेचारगी पर आंसू बहाने के सिवाय उनके पास कोई चारा नहीं । मुस्लिम महिला की घुटन भरी जिन्दगी ऐसी खबरों को पढ़ कर घर के अन्धेरे कोनों में सुबक कर रोने में ही बीत जाती है । कोई एक भी तो उनकी नहीं सुनता उनकी सिसकियों भरी आवाज । न घर में न घर के बाहर न भाई न पिता न मस्जिद न मुल्ला मौलवी न नेता न समाज सुधारक सब के सब मौन । कोई भी तो मौलवी ऐसी घटना के विरुद्ध फतवा जारी नहीं करता । उल्टा पाशविक धार्मिकता की आड़ में स्त्री तो पुरुष के पांव की जूती, बच्चा पैदा करने वाली मशीन पुरुष की भोग्या ऐसी धारणाओं की बलिवेदी पर परवान हो जाती है । चार पांच सौतों के साथ जीवन कितना नारकीय बन जाता है यह तो केवल भोगने वाला ही जान सकता है । किसी मौलवी का जिहाद ऐसी कुप्रथा के विरुद्ध क्यों नहीं चलता उल्टा मुल्ला साहिब इसको मुता विवाह का नाम देकर अपना धार्मिक कर्मकाण्ड करता है । यह मुता विवाह है क्या ? केवल थोड़े समय के लिए शादी फिर तलाक तलाक तलाक । असंख्य अस्वस्थ रहन सहन, दारिद्रय, अशिक्षा ने हमारे समाज को उजाड़ बना दिया है । भेड़ बकरी और जानवरों के समान हमारी जिन्दगी, बीबियों के बीच प्रायः धक्का मुक्की, केश केशी व जूतमपैजार होती ही रहती है । मियां साहब अगर घर में हो तो बात ही क्या ? दोनों की ही ढोर ( जानवरों ) के समान पिटाई होती है । और उसके बाद तीसरी को लेकर मियां साहब दरवाजा बन्द करके अपने सोने वाले कमरे में पहुंच जाते हैं । हे अल्लाह ! ऐसा कैसा जीव बदा है तुमने हमारे लिए ।
प्रेम , तो हमारे जीवन में कभी आता ही नहीं है । प्रकाश की एक किरण कभी देखी नहीं । प्यार का उदाहरण तो बेगम मुमताज में ही देख पाते हैं जिसकी याद में अपूर्व शिल्पकला युक्त ताजमहल शाहजहां ने बनवाया था । उसी बेगम की मृत्यु तेरह संताने पैदा करने के बाद, जब संतान धारण करने के ताकत न रहने के बाद भी गर्भधारण करना पड़ा तो अंतिम संतान के जन्म में मौत के आगोश में सो गयी । यह है मुस्लिम बादशाह के प्यार का अनोखा ढंग । अब तुम ही बताओं ऐ अल्लाह ! जहां शहजादियों के प्रेमी या प्यारी बेगमों की यह हालत है तो हम जैसी साधारण मुस्लिम महिलाओं का तो कहना ही क्या ? हमारे प्यार के पैमाने को तुम ही नाप सकते हो अल्लाह ! तलाक वाली तीखी धार तलवार महिलाओं के सिर पर कब आ गिरे कुछ कहा नहीं जा सकता, अगर कही पान में चूना लगाने में तनिक देरी हो जाए तो तलाक की तलवार से कब कत्ल होना पड़े कुछ भरोसा नहीं । मियां जी की मन की मौज उनकी मर्जी से मजाक में भी तीन बार तलाक कह देने से सालों साल का विवाहित जीवन कब बिखर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता । ऐसे तलाक का परिणाम छोटे बच्चे मां के प्यार से विहीन, नन्हें मुन्ने बिलखते हुए बच्चे, स्वास्थ्य से रहित उपेक्षा व अनादर का जीवन जीते जीतेकब आतंकियों की जमात में चले जाते हैं पता ही नहीं चलता । अन्य समाजों मे ऐसा नहीं होता यह बात नहीं है पर धर्म के नाम पर वहां ऐसा नहीं होता । मौलवी लोग मियांओं को इस प्रकार का उपदेश देते हैं कि बच्चे पैदा करके फायदा उठाओ, संख्या बढ़ाओ और देश व्यवस्था में अव्यवस्था फैलाओ । पर अल्लाह ! उनके पागलपनें की धुन को सहन करते हैं हम मां बनकर । विवाहित मुस्लिम स्त्री कभी खाली नहीं रहती या तो गोद में या गर्भ में एक न एक बच्चा रहेगा । शीलहीन, स्वास्थ्यहीन होकर विचित्र जिन्दगी जीनी होती है उसे हम लोग पड़ोस में ही हिन्दू नारियों की जिन्दगी देखते ही रहते हैं । अहा ! कितनी पवित्रता, शुचिता, प्रेम और विश्वासपूर्ण जीवन जीती हैं । पर हमारे जीवन में पवित्रता, व सतीत्व के अवसर ही कहां हैं ? तलाक के बाद अगर मियां जी को पश्चाताप हो तो घर में बीबी को रख नहीं सकते क्योंकि इस्लाम की शरीयत का पंजा अड़ाकर मौलवी लोग मार्ग अवरुद्ध कर देगें । यदि वह लड़की वापिस अपने पति के पास लौटना चाहे और पति रखनाचाहे तो एक नयी यातना झेलनी होगी । फिर एक दूसरे मियां के साथ शादी रचाए, उस शादी के तीन दिन व तीन रात घृणामय दाम्पत्य जीवन बिताने के बाद वह महिला पवित्र होगी व कुवारी मानी जाएगी । फिर यदि वह मियांजी कृपा करके तलाक की भीख देगें तो ही पूर्व पति उसे ग्रहण कर सकता है । अगर कहीं लड़की खुदा की दया से सुंदर हो तो बहुतों का मन बदल जाता है और तलाक नहीं देते और परिणामस्वरूप खूना खानी तक हो जाती है । ऐसा है हमारा जीवन । ओ अल्लाह ! किसे कहें ? किससें बोले अपनी व्यथा ? यदि विवाह करें तो भंयकर सजा मिले, शिकायत करें तो मुखालफत ।
इस पृथ्वी के समस्त धर्मों में कौमार्य, ब्रह्‌मचर्य , पवित्रता आदि की मान्यता है परन्तु हमारे यहां नहीं, । हमारे समाज में बहुशिक्षित मुसलमान तो हैं और इन बातों को वे जानते भी हैं परन्तु मजा लूटने के लोभी वे भी है इसीलिए कोई भी इसके विरोध में कुछ नहीं कहता । अधिक आधुनिक शिक्षित जो हैं वे हिन्दू समाज के आसपास चक्कर काटते रहते हैं वे भी हमारी सुध लेने की जरूरत नहीं समझते शायद इससे ही हमारी तरफ देखकर काजी अब्दुल ओद्ध ने एक बार कह डाला कि चौदह सौ वर्षों के इतिहास में इस्लाम मानव सभ्यता के अन्धकार में एक छोटा सा चिराग भी न जला सका और आबू सय्‌यद समग्र जीवन रवीन्द्र की चर्चा करते रह गए । इसी प्रकार एमसी छागला , उपराष्ट्रपति हिदायतुल्लाह, सिकन्दर बख्त, डा. जिलानी, सैय्‌यद सुजतबा अली आदि जो हमारे समाज में मनुष्यता में श्रेष्ठ हुए वे सब इस मुस्लिम समाज से किनारा करते मुक्त हिन्दू समाज के निकट ही रहने लगे । इसी कारण हम मुस्लिम महिलांए मुल्ला मौलवी के शासन के अधीन अन्धकार भरा जीवन जीते हुए, भर्राए हुए ह्‌रद्य सेरुदन भरा व असहनीय यातनाओं भरा जीवन जीने के लिए रह गयीं । कोई साहित्यकार अथवा पत्रकार हमारे जीवन के कष्टमय अन्त स्थल में नहीं झांक सका, कोई हमारे दुखद आसुंओं को नहीं देख पाया, किसी ने कोई किस्सा कहानी या निबन्ध नहीं लिखा । भारत सरकार ने हमें वोट देने का अधिकार तो दिया परन्तु हमारी सुधि लेने के लिए कोई कार्य नहीं किया जिससे हमारा जीवन शांति से व्यतीत हो सके । हिन्दू नारियों के लिए हिन्दू कोड बिल पास करके उनको सुख पूर्वक रहने का अधिकार मिल गया पर हमारे लिए कुछ भी ऐसा नहीं किया गया । हमारे समाज ने कोई भी तब्दीली मुस्लिम विवाह पद्धति में नहीं की है । मार्क्सवादियों के ऊपर भरोसा था पर उन्होंने भी हमारे लिए कुछ नहीं किया जबकि तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमानिस्तान आदि देशों में मुस्लिम स्त्रियां मार्क्सवादी शासन में मुक्त हो गयी हैं । अब अरब देशों से आकर कोई शेख उन्हें खरीदने की जुर्रत नहीं कर सकता । कोई भी उन्हें जबरदस्ती बाहर नहीं ले जा सकता । अब वह अत्याधिक बच्चे पैदा करने के बोझ से मुक्त हो चुकी हैं । हर वक्त गर्भ धारण की परिस्थिति से भी वह स्वतंत्र हो चुकी हैं । अब कोई भी मुल्ला उनके जीवन का नियंता नहीं । परन्तु हमारे देश के मार्क्सवादी तो मुल्लाओं के ही वश में हैं । मंसूर हबीबुल्ला जैसे कट्टर मार्क्सवादी भी मुल्लाओं के अधीन मियाओं को प्रसन्न करने के लिए मक्का गए, हज करके हाजी बने ।
हे अल्लाह ! तुमने हमारे लिए कही भी शांति व अवसर का नहीं छोड़ा । हमारे प्रति तुम्हारी सदा ही उदासीनता और उपेक्षा बनी ही रहीं । अनन्त यातनाओं में हमारे दिन व रात बीतते हैं । संसार की सभ्यतांए कई कुप्रथाओं को छोड़कर उन्नति की मंजिल की ओर बढ़ती रहीं पर हम जस की तस वहीं की वहीं बैठी रहीं । यहां तक की हिन्दू समान ने सती प्रथा जैसी वीभत्स प्रथा को समाप्त कर दिया । बाल विवाह व वृद्ध कें साथ विवाह की प्रथा को भी समाप्त करने के लिए कानूनी जामा पहना दिया है । समय के प्रभाव से सभी अमानवीय प्रथाएं समाप्त हो गयी हैं । पर हमारे मुस्लिम महिलाओं के लिए तो कुछ भी नहीं हुआ । हमारे मुस्लिम समाज में भी परिवर्तन तो घटित हुए हैं पर सब पुरुषों की अनुकूलता के लिए ही । ईराक में बसरा के पास एक गांव था जो खोजियों ( हिजड़ा ) युवकों के लिए प्रसिद्ध था । खोजी लोग ज्यादा तर नौजवान किशोर होते थे जो अप्राकृतिक व अमानवीय तरीके से खोजी बनाए जाते थे । इस अवैज्ञानिक प्रक्रिया में में ६० लड़के मृत्यु को प्राप्त हो जाया करते थे । ये खोजी सुल्तान, धनी व बादशाहों के हरम की चौकीदारी किया करते थे ताकि हरम से स्त्रियां भाग न सकें । अब इस कातिल प्रथा का अन्त होचुका है । हम आज भी उसी कत्लगाह में रह रहीं हैं । हमारे समाज के पुरुष आज भी हमारे आंसुओं के प्रति उदासीन हैं । केवल सम्पत्तिका अधिकार देकर समझते हैं कि हमें सब कुछ दे दिया है । कितना बढ़िया है यह सम्पत्ति का अधिकार जबकि हमारा निकाह आज भी अनिश्चित है । यह संपत्ति का अधिकार हमें तलाक से कितनी निजात दिला सकता है । मुस्लिम पर्सनल लॉ के कारण मुस्लिम महिला का जीवन लांछनमय हो गया है । उत्तर भारत के प्रख्यात पत्रकार मुजफ्‌फर हुसैन ने लिखा है तलाक तलाक तलाक के नाम से एक फिल्म हिन्दी भाषा में तैयार हो रही थी हमारे मियांओं ने फिल्म के शीर्षक को लेकर आपत्ति प्रकट की और फिल्म का नाम बदलकर निकाह कर दिया गया । अब आपको बताते है कि फिल्म का नाम बदलने के लिए कौन से कारण बताए गए । मियांओं ने यह कहा कि मानों जब मियांजी फिल्म देख कर घर लौटे और बीवी ने पूछ लिया कि कौन सी फिल्म देख कर आए हो । जवाब में मियां जी ने कहा तलाक तलाक तलाक । तो तीन शब्दों में बीवी का जीवन हलाक हो जाएगा । अजीव तमाशा है फिल्म का नाम भी बताने पर मुस्लिम महिला कष्टमय जीवन बिताने पर मजबूर हो जाएगी ।
ईरान में खुमैनी के शासन में सैकड़ों महिलाओं की हत्या कर दी गयी , उनका अपराध क्या ? केवल खुमैनी के मुस्लिम शासन के विरुद्ध थोड़ी सी जुबान खोलना बस इसी कारण इस्लाम के नाम पर उनको नरकपूर्ण जीवन बिताने पर मजबूर होना पड़ा । सैकड़ों महिलाऒं ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी । क्योंकि इस्लाम में इस्लाम के विरुद्ध बोलने का हक किसी को नहीं है । विष्णु उपाध्याय ने इस घटना के बाबत आजकल समाचारपत्र में लिखा परन्तु आज तक एक भी शब्द मुस्लिम जगत नहीं बोला । यदि अन्य समाज की महिलाओं के साथ बलात्कार होता है तो समाचार पत्र उसकी चीख पुकार से काले को उठते हैं । एक आंधी, एक तूफान, एक हलचल सी मच जाती है ऐसी घटना के विरुद्ध । पर इस्लाम का अर्थ तो शान्ति चुपचाप, खामोशी से सब देखना है । ओ अल्लाह ! तुम ही हमारा करुण क्रंदन सुनो । तुम्हें न कहें तो किसे कहें ? कौन सी दर पर दरवाजा खटखटाएं ? तुमने हमारे लिए कोई सुख का अवसर क्यों न छोड़ा । धनी घर में बेगमें बनें तो असंख्य सौतों के बीच में विलास का साधन बनकर रह जांए । ईर्ष्या और प्रतिद्वदिता का जीवन जिएं । अगर गरीब घर में पहुंचे तो दिन रात जी तोड़, कमर तोड़ मजदूरी और उस पर भी हर साल संतान पैदा करना । पूरे समय गर्भ धारण करना यही हमारे भाग्य में लिखा है । गरीब घर की बेगम बनकर हमारी तकदीर में तलाक की तलवार जिधर भी जाएं लटकी ही रहती है । इस तलाक से हमारे बच्चे भी भिखारी बनकर या अपराधी बनकर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं । हावड़ा स्टेशन के आस पास ऐसी ही परित्यक्ता महिलांए व उनके बच्चों की भीड़ देखी जा सकती है । वहां पर दाड़ी वाले मुल्ला जी की उपस्थिति भी इसीलिए होती है ताकि वह देखता रहे कि इन महिलाओं व बच्चों ने इस्लाम तो नहीं छोड़ा । उन दाड़ी वाले मुल्ला का उनके स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं । वह अच्छे इंसान बनते हैं या नहीं उससे भी मुल्ला जी का कोई सरोकार नहीं । हे अल्लाह ! मुस्लिम स्त्रियों की जिन्दगी में दुख, वेदना, हताशा व दरिद्रता के सिवाय कुछ नहीं बचता । उनके पास आंसुओं की सम्पत्ति , चुपचाप सिसकने की इजाजत के सिवा कुछ भी नहीं । इसी से ऐ अल्लाह ! हमें रोने दो , शान्ति से रोने दो , तबतक रोने दो जब तक हम मौत को प्राप्त नहीं होतीं । अल्लाह कृपया हमें अकेला ही छोड़ दो ।