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आन्ध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार कौन चला रहा है [Andhra Pradesh :wovaisi & Congress]

आन्ध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार कौन चला रहा है ? कांग्रेस या ओबैसी ? या दोनों मिलकर ? जिस नरपिशाच मोहम्मद अब्दुल कादिर नामक कांस्टेबल ने 1990 मे हैदराबाद मे भडकी भयानक दंगे के दौरान जब पुलिस इंस्पेक्टर ने इसे दंगो को नियन्त्रित करने के लिए मुस्लिम दंगाई भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया तो इसने दंगाईयों के बजाय उस इंस्पेक्टर को ही गोलियों से भून दिया था | लेकिन आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार ओबैसी के आदेश से इसे बार बार पेरोल क्यों दे रही है ?

चित्र में जिसे को आप देख रहे है उसका नाम है मोहम्मद अब्दुल कादीर है. यह भूतपूर्व पुलिस कांस्टेबल है.
१९९० में हैदराबाद में दंगा हुआ उस दंगे में जब इसका सीनियर इसे एक दंगाई मुस्लिम भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया तो ये भीड़ पर गोली चलाने के बजाय उस सीनियर पर ही गोली चला दी. न्यायालय के द्वारा इसे आजीवन कारावास की सजा मिली है लेकिन अभी इसकी क्षमा याचना रास्ट्रपति के पास है. इसको छुड़ाने के लिए बहुत से मुस्लिम संगठन लगे हुए है. |

मित्रों, आन्ध्र की पहले की टीडीपी सरकार ने इसे एक मिनट भी पेरोल नही दिया, लेकिन आज की कांग्रेस सरकार इसे ओबैसी के कहने पर बार बार पेरोल पर रिहा कर रही है और इतना ही नही इसके पेरोल को बार बार बढाती भी रहती है |

मित्रों, ये दोनों ओबोसी असदुद्दीन ओबैसी जो हैदराबाद से सांसद है और अकबरुद्दीन ओबैसी जो हैदराबाद के चारमिनार से विधायक है इन दोनों का मुख्य मकसद भारत को इस्लामिक राष्ट्र घोषित करना है | 
अगर आप इनकी पार्टी मजलिसे ईतेहादुल मुस्लिम [MIM] के सम्मेलनो के वीडियो यूट्यूब पर देखेंगे तो ये बार बार कहते है कि भारत को इस्लामिक देश बनाना ही मुस्लमानों का प्रथम उद्देश्य होना चाहिए |

ये अकबरुद्दीन ओवैसीने कई बार हिंदूधर्म और हिंदू देवी देवताओ के बारे मे खुले मंच से बहुत ही अभद्र बाते कहीं है लेकिन राहुल और सोनिया इसे गलत नही मानते क्योकि इसने हिन्दुओ के देवी देवताओ को अपमानित किया है | आप इस वीडियो को देखे , इसमें ये नीच ओवैसी भगवान राम और उनकी माँ कौशल्यादेवी पर किस तरह अश्लील और अभद्र बाते कह रहा है |



लेकिन  राहुल और सोनिया तो यही चाहते है किभारत से हिंदुत्व खत्म हो जाये और हिन्दुओ को बार बार अपमानित किया जाये |

मित्रों, अभी कुछ दिन पहले इस अकबरुद्दीन ओवैसी पर जानलेवा हमला हुआ, मजे की बात ये की हमलावर भी मुस्लिम ही था जिसका वेशकीमती घर इन ओवैसी बंधुओ ने कब्जा कर लिया था |
इसका हालचाल लेने के लिए सोनिया गाँधी ने मुख्यमंत्री सहित पूरी आन्ध्रप्रदेश सरकार को उसके घर भेजा था और तो और केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद भी स्पेशल प्लेन से हैदराबाद उसका हालचाल लेने गए थे | 
मित्रों  जब बाला साहेब ठाकरे की धर्मपत्नी और उनके पुत्र की एकमहीने के भीतर ही दुखद मृत्यु हुआ था तब तात्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा मातोश्री बाला साहेब को सात्वना देने गए थे तब लेफ्ट, सपा, और कांग्रेस ने संसद मे बहुत हंगामा मचाया था कि एक साम्प्रदायिक नेता के घर प्रधानमंत्री सात्वना देने क्यों गए ? और तो और उस समय शरद पवार कांग्रेस मे थे और जब शरद पवार गए तो कांग्रेस ने उनसे नोटिस देकर पूछा कि आप क्यों गए ?

आखिर इतना दोगलापन क्यों ? एक कट्टर मुस्लिम जिसके सैकडो भड़काऊ भाषण आज भी यू ट्यूब पर भरे पड़े है और जो संसद मे मुसलमानों को इस देश की ईंट से ईंट बजा देने का आह्वान करता है उसके घर जाना क्या कांग्रेस गलत नही समझती ? 
आन्ध्र के उपमुख्यमंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए






आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए


आन्ध्र के रेवेन्यूमंत्री रघुवीर रेड्डी, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए


आन्ध्र प्रदेश विधानसभा के स्पीकर एन मनोहर, ओवैसी के घर जाकर उसका हाल चाल लेते हुए

स्पीकर मनोहर, ओवैसी के घर नाश्ता करते हुए

स्पीकर खुद सहारा देकर ओवैसी को घर से बाहर ला रहे है

सोनिया गाँधी के निर्देश पर केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ओवैसी के घर जाकर उसके स्वस्थ्य की जानकरी ली और सोनिया और राहुल को इस बारे मे रिपोर्ट दिया ..


मेरे हिंदू मित्रों, जागो और अपने जातिपाँति, ऊँचनीच आदि के भेदभाव भुलाकर संगठित हो जाओ | नही तो हिन्दुओ के लिए आने वाला कल बहुत ही भयानक होने वाला है |




यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?


लेबनान मे गृहयुद्ध प्रभावित एरिया का निरीक्षण करता ओबैसी

मित्रों, क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?

मित्रों, इजराइली ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल मे आतंकवाद फैला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवको का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है | लेकिन चूँकि भारत की कांग्रेस सरकार को सिर्फ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है |

मित्रों अभी कुछ दिन पहलेसंसद मे आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि "यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे" लेकिन किसी भी कांग्रेसी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की | और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज़ नही बताया सिर्फ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की |

सबसे बड़ी चौकने वाला खुलासा ये है कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिपारिश पर मिला था जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस की ही सरकार की ख़ुफ़िया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता और अहर्ता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट इस्शु कर दिया |

मित्रों, साधारण  पासपोर्ट का कलर नीला होता है बल्कि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाईअड्डे पर तलाशी नही होती और इन्हें "वीजा आन अराइवल" की भी सुविधा होती है और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों मे मुख्यमन्त्रियो और राजदूत तथा दूतावास मे सचिव स्तर के अधिकारियों  को ही इस्शु हो सकता है | 


मित्रों, हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है जो छोटे छोटे बच्चो को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है | लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था और वहाँ ४% हिंदू और १०% यहूदी  भी रहते थे | लेबनान जहां पहले ८०% ईसाई तथा अन्य धर्म और २०% मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था | और इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी | इतना ही नही खूबसूरत लेबनान मे कई हालीवुड और बोलिउड की फिल्मो की शूटिंग होती थी | रामानंद सागर ने सत्तर के दशक मे धर्मेन्द्र और माला सिन्हा को लेकर एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम "आखें' उस फिल्म की 80% शूटिंग बेरुत मे हुई थी और कई गाने जैसे "मिलती है जिंदगी मे मोहब्बत कभी कभी" की शूटिंग भी बेरुत मे ही हुई |



लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर लेबनान  के मुस्लिम लीडरो ने ग्रहण लगा दिया |मस्जिदों मे और अपने सम्मेलनों के मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर क्ब्ज्जा करने की बाते करते थे | फिर धीरे धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड गया और फिर लेबनान 25 सालो से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया | आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमे ईसाई और अन्य धर्मो के लोग रहते है और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है उसी तरह राजधानी बेरुत का भी दो अघोषित हिस्सा है जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते है |


मित्रों, जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है तो उसे लोकसभा अध्यक्ष की लिखित अनुमति लेनी पडती है भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो | एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फ़ाइल नही आई जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो |


अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाला ओबैसी को कांग्रेस साम्प्रदायिक क्यों नही मानती ? 


मित्रों, कांग्रेस की नजर मे  सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है | अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा | पूरी मीडिया और कांग्रेस सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे | लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा | यहाँ मैंने "सिर्फ" इसलिए लिखा है क्योकि ओबैसी ने आजतक संसद मे सिर्फ मुस्लिम हित और मुस्लीमों के बारे मे ही मुद्दे उठाये है और सिर्फ मुस्लिम लोगो की ही मदद करते है यहाँ तक आसाम मे भी जो उन्होंने रिलीफ कैम्प लगाया उसके उपर लिख दिया " only for muslims" इन्होने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया लेकिन जब एक पत्रकार ने इसने पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो ये माइक फेक दिये |

मित्रों, आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद मे भडके कई दंगो के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है यहाँ तक की केन्द्र की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है | लेकिन सब बेकार |

सोचिये क्या राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी या तोगड़िया या अशोक सिंघल जी के साथ फोटो खिचवा सकते है ? नही क्योकि ये लोग तो हिन्दुवादी है और भारत मे हिन्दुवादी होना सबसे बड़ा अपराध है |


लेकिन वहीराहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ओबैसी के साथ कई कई घंटो तक बैठते है और उसके साथ फोटो खिचवाते है | क्योकि सोनिया ने जो काला कानून "साम्प्रदायिक हिंसा निवारण बिल" बनाया था उसके अनुसार तोसिर्फ हिंदू ही दंगाई होते है, हिंदू हिंसक होते है और हर बार सिर्फ हिंदू ही पहले दंगे भड़काते है |


मित्रों, सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मीडिया और कांग्रेस की हिन्दुओ के बारे मे इस दोगली मानसिकता का जिम्मेदार कौन है ? 

मित्रों, इसके जिम्मेदार हम सब हिंदू  खुद ही है | ये हम हिंदू ही है जो सब कुछ जानते समझते हुए भी जतिपति और दूसरे छोटे छोटे मुद्दों और कांग्रेस के द्वारा दिये गए झूठे लालचो और प्रलोभनों के बहकावे मे आकर इस कांग्रेस को वोट देकर इसे मजबूत करते है | हिंदू मित्रों, अपने बारे मे तो नही कम से कम पचास साल बाद आने वाली अपनी हिंदू पीढियों के बारे मे सोचो | जो हाल पाकिस्तान, सीरिया, लेबनान, इंडोनेशिया, फिलीपींस और भारत मे कश्मीर, केरल और आसाम मे हिन्दुओ के साथ हुआ है और जो आज हिंदू इन जगहों पर पर अत्याचार झेल रहे है वही आज के पचास सालो के बाद पूरे भारत मे झेलेंगे |

           

                     जय हिंद !!! जय भारत !!! वन्देमातरम !!

इस्लाम में नारीत्व के साथ छलावा – २

इस्लाम द्वारा स्त्रियों पर लादी गयी निम्नलिखित सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कोई भी इमानदारी से इसी निष्कर्ष पर पहुचेगा कि यश सब जान बुझ कर किया गया है ताकि स्त्रियों को कामवासना तृप्ति के खिलौने के रूप देने के लिए मानवाधिकारों से वंचित रखा जाय जिससे पुरुष समुदाय अधिकाधिक संख्या में इस्लाम में घुस जाए|
१.    स्त्रियों का यह मजहबी कर्तव्य है कि वे अधिअधिक संख्या में बच्चे पैदा करे|       इब्न ऐ माजाह खंड १ पृष्ठ ५१८, ५२३ के अपने “ सुनुन्” में यह उल्लेख है कि पैगम्बर ने कहा था: “ शादिया करना मेरा मौलीक सिध्दांत है | जो कोई मेरे आदर्शो को अनुसरण नहीं करता, वह मेरा अनुयायी नहीं है| शादिया करो ताकि मेरे नेतृत्व में सर्वाधिक अनुयायी हो जाय फलस्वरूप में में दूसरे समुदायों से ऊपर अधिमान्यता प्राप्त करूँ |” इसी प्रकार मिस्कत खंड ३ में पृष्ठ ११९ पर इसी प्रकार कि एक हदीस है: “ कयात के दिन मेरे अनुयायियों कि संख्या अन्य किसी भी संख्या से अधिक रहे, और इस उद्देश्य कि पूर्ति स्त्री जाती पर मात्र संतान उत्पत्ति के अनन्य भार को डालकर संभव थी|”
स्पष्टत: एक स्त्री जो दर्जन भर बच्चे कि माँ होगी | उसके मस्तिष्क में तो इसी भय से आक्रांत रहने कि संभावना है कि यदि उसका पति उसे छोड़ दे तो उसका क्या होगा ?? पत्नी को अपने अंगूठे के निचे रखने के लिए यह भय पर्याप्त शक्तिशाली अस्त्र है|
२.    दूसरी शर्त जो इस्लाम में स्त्रियों कि स्थिति का निर्धारण करती है वह कुरान में ५७ अल हदीद २७ में दी गयी है | “ संसार त्याग कि प्रथा उन्होंने स्वयं निकाली हमने इसका आदेश कभी नहीं दिया था, दिया था तो बस अल्लाह कि प्रसन्नता चाहने का, तो उन्होंने उसका जैसा पालन करना चाहिये था नहीं किया|”  
साधारण शब्दों में इन आयतो का तात्पर्य है कि ईसाइयों ने बैरागी का पालन करके प्रभु कि इच्छा कि अवज्ञा कि है, क्योकि पुरुष द्वारा स्त्रियों का सम्भोग अल्लाह का मनोरंजन है|
इसी प्रकार सती कुछ भी नहीं है किन्तु वह तो पुरुष कि भोग बिलाश कि वास्तु है | वास्तव में प्रतेक स्त्री को यह ज्ञान है वह आदर का व्यवहार चाहती है, परन्तु इस्लाम जो एक सेमिटिक दर्शन का अनुशरण करता है जिसके अनुसार एक पुरुष को उसके आदेशानुसार उसके कामवासना कि पूर्ति होना चाहिए | यही कारण है कि इस्लाम में स्त्री के सम्भोग में सहमती कि कोई अवधारणा नहीं है | इस्लाम में एक स्त्री पुरुष कि जोत होती है और एक पुरुष को उसे स्विच्छा पूर्वक उपयोग करने का अधिकार है | यही कारण है कि इस्लामी कानून का उद्देश्य पुरुष कि प्रभुता है, स्त्री के ऊपर तद्नुरूप अपमान आरोपित हो जाता है |
 निम्नलिखित आयत से पाठक इस तथ्य का निर्णय कर सकते है |
     “ उन स्त्रियों के भी सामान्य नियम के अनुसार वैसे ही अधिकार है जैसे कि स्वयं पर उनपर है, हाँ पुरुषों पर उन पर एक दर्जा प्राप्त है |” - (२ अल बकरह २२८)
     यह आयत बहुत ही विवादस्पद है और इस्लामी कट्टरपंथी उसे स्त्री एवं पुरुषों कि समानता सिध्द करने के लिए खीचते तानते रहते है| इसलिए इसकी सच्चाई को प्रदर्शित करने के लिए दूसरा हदीस है :
     “यदि स्त्रिया आप के आदेशो का पालन करे तो उन्हें उत्पीडित न करो ........... उनकी बात ध्यान से सुनो, उनका आप पर अधिकार है कि आप उनको भोजन एवं वस्त्रों का प्रबंध करो” – ( इब्न ऐ मजह खंड १ पृष्ठ ५१९)
इसी प्रकार स्त्री के अधिकार उनके भरण पोषण तक ही सिमित है बशर्ते कि वह अपने पुरुष कि अग्या का पालन करे | इस्लाम सा सामान्य विश्वास है कि पुरुष स्त्री के अपेच्छा क्षेष्ठ होता है | वास्तव में कुरान का कानून इस विचार कि पूर्णतया पुष्टि करता है |
          “ .............................. स्त्रियों में से जो तुम्हारे लिए जायज हो दो दो, तीन- तीन, चार-चार तक विवाह कर लो |”
                                        ( ४ अननिसा ३)
यह पुरुष को क़ानूनी अधिकार दिया गया है कि वह एक समय में अपनी पसंद कि चार स्त्रिया रख ले | मुस्लिम विद्वान बहु विवाह कि लज्जा से बचने के लिए इस आयत कि भिन्न भिन्न ब्याख्याये करते है| उदाहरण स्वरूप वे कहते है कि स्त्रियों को बहु विवाह ( एक समय में एक से अधिक पति ) कि अनुमति इस लिए नहीं दी गयी है क्योकि बच्चो के पिता का पता लगाना संभव नहीं |
इन सबके ऊपर रखैलो के विषय में इस्लामी कानून तो एक पुर्रुष को इतनी स्त्रिया हरम में रखने कि अनुमति देता है जीतनी वह रख सकता है | उदाहरण स्वरूप भारत के अकबर महान के हरम में ५००० रखैल थी और उनके पुत्र जहागीर के हरम में ६००० रखैल थी | इनके लिए सिर्फ एक ही नाम दिया जा सकता है वह है “ निजी वैश्यालय | तो भी मुसलामान विद्वान नैतिकता और स्त्रियों के अधिकारों कि बातें करते है|
३.    हमें यह बताया गया है कि पुरुषों के स्त्रियों पर अधिकार है, वैसे स्त्रियों के भी पुरुषों पर अधिकार है| इसे बराबरी के प्रमाण के रूप में उल्लेख किया जाता है| वास्तव में यह अत्यंत भ्रामक है क्योकि उसके पारस्परिक अधिकारों का सम्बन्ध ही पुरुष को मालिक और स्त्री को दासी बना लेता है|
स्त्रियों को पुरुषों के ऊपर एक ही अधिकार है, वह अहि भरण पोषण का अधिकार |
यदि कोई पति अपने पत्नी को पत्थारो कि गठरी लाल पर्वत से उस काले पर्वत तक ले जाने को कहे तो उस स्त्री को इसे पुरे मनोयोग से पालन करना चाहिए |                   ( इब्न ऐ मजाह खंड १ अध्याय ५९२ पृष्ठ ५२० )
४.    अल्लाह कसम, मोहम्मद का जीवन कौन नियंत्रित करता है, एक स्त्री अल्लाह के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर सकती जब तक उसने अपने पति के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया है, यदि वह स्त्री ऊंट पर सवारी कर रही हो और उसका पति इच्छा प्रकट करे तो उस स्त्री को मना नहीं करना चाहिए |      (इब्न ऐ मजाह खंड १ अध्याय ५९२ पृष्ठ ५२० )
पुन: “यदि एक पुरुष का मन सम्भोग करने के लिए उत्सुक हो तो पत्नी को तत्काल प्रस्तुत हो जाना चाहिए भले ही वह उस समय सामुदायिक चूल्हे पर रोटी सेक रही हो|”     ( तिरमजी  खंड १, पृष्ठ ४२८ )

क्रमश: ............... अगले ब्लॉग में ....

अमेरिका पर 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकी हमले में देश की गुप्तचर सेवा पूरी तरह से विफल रही थी।

राजधानी दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फार डिफेंस स्टडीज एंड एनेलिसिस में सीनियर रिसर्च एसोसिएट राजीव नयन का मानना है कि हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवादी संगठन अलकायदा के खिलाफ जो अभियान शुरू किया था उसमें उसने पाकिस्तान पर भरोसा कर बहुत बड़ी गलती की।

पाकिस्तान कभी भी अमेरिका को इस अभियान में पूरा सहयोग नहीं देगा जिसके कारण उसके सफल होने की संभावना भी कम होगी।
राजीव नयन ने कहा कि आतंकवाद को पालने पोसने करने वाला पाकिस्तान भी अब आतंकवाद का दंश झेल रहा है। आतंकवाद पाकिस्तान की जड़ों में इतने अंदर तक समा गया है कि इसे नष्ट करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारत सहित पूरे विश्व में 11 सितम्बर को हुए आतंकवादी हमले के बाद ऐसे हमले रोकने के लिए व्यापक तैयारी हुई है लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि आतंकवादी पहले के हमले में प्रयोग तरीका नहीं दोहराएंगे।
अमेरिका में 11 सितंबर के हमले में मारे गए लोगों की याद में प्रतिवर्ष 11 सितम्बर ‘पैट्रियट डे’ के रूप में मनाया जाता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 25 अक्टूबर 2001 को संयुक्त प्रस्ताव 71 पारित किया था। प्रस्ताव का 407 सांसदों ने समर्थन किया था जबकि इसके विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा था। प्रस्ताव में अनुरोध किया गया था कि राष्ट्रपति प्रतिवर्ष 11 सितम्बर के दिन को पैट्रिअट डे के रूप में मनाना निर्धारित करें।
तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने 18 सितम्बर 2001 को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप प्रदान कर दिया। शुरूआत में इस दिन को आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने का दिन कहा जाता था। चार सितम्बर 2002 को बुश ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 11 सितम्बर 2002 के दिन को पैट्रिअट डे घोषित कर दिया।
पैट्रिअट डे के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की याद में देश के सभी घरों, राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस, देश एवं विदेशों में स्थित सरकारी इमारतों और प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी झंडे को आधा झुकाने का आह्वान करते हैं। राष्ट्रपति इसके साथ ही सभी नागरिकों से स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 46 मिनट पर कुछ समय के लिए शांति रखने को कहते हैं। यह वही समय है जब आतंकवादियों ने 11 सितम्बर 2001 को अपहृत पहला विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नार्थ टॉवर बिल्डिंग से टकराया था।
11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले में सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्रों के कुछ समुदाय के लोग पैट्रिअट डे के दिन गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। इसके साथ ही 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले का व्यक्तिगत रूप से साक्षी रहने वाले अथवा इसमें अपने प्रियजनों को खोने वाले लोग मारे गए लोगों की स्मृति स्थलों पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
पैट्रिअट डे के दिन कोई संघीय अवकाश नहीं होता इसलिए इस दिन शिक्षण संस्थाएं और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद नहीं होते। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अपने पूर्व निर्धारित समयानुसार चलती हैं। हालांकि कुछ लोग अथवा संगठन हमले में मारे गए लोगों की याद में कुछ समय के लिए सेवाएं रोक सकते हैं। लेकिन सामान्य तौर पर इसके कारण सार्वजनिक जीवन कुछ मिनट के लिए ही ठहरता है।
11 सितम्बर 2001 को चार विमानों का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता आतंकवादियों ने जानबूझकर महत्वपूर्ण इमारतों से टकराया। इन इमारतों में वाशिंगटन स्थित पेंटागन तथा न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावर शामिल थे। चौथा विमान पेंसिलवानिया के एक मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हमले में करीब तीन हजार लोग मारे गए और काफी बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।
अमेरिका के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था। इस आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई। इस घटना का अमेरिका के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी काफी प्रभाव पड़ा। इस घटना के कारण विशेष रूप से पश्चिम एशिया के इस्लामी देशों के साथ अमेरिका के संबंधों पर काफी प्रभाव पड़ा।

गृहमंत्री चिदंबरम हिंदुओ के भावनाओ से खेल रहे है

“गृहमंत्री जी ने भगवा आतंकवादियों से सावधान रहने कि हिदायत जो दी है” उनका इशारा कहा था. क्या कोई नहीं जनता | सब जानते है कि ये क्या कहना चाहते है और ये किसे खुश करना चाहते है कभी सुना है की कोई नेता (स्पेशल कांग्रेस पार्टी का) कभी ये कहा है की "मुसलमान आतंकवादी से सावधान रहने की जरुरत है" दिमाग लगाने की जरुरत नहीं है कभी भी कोई नहीं कहा होगा, कम् से कम भारतीय राजनीति में तो कभी किसी नेता ( कुछ को छोड़ कर ) में दम ही नहीं है कि मुस्लिम आतंकवादी को “ मुस्लिम आतंकवादी “ कहे | क्यों कि ऐसा कह कर अपना वोट बैलेंस कम नहीं करना चाहते है वो पिशाच जानते है कि ऐसा करने से वोट बैंक कम हो जायेगा लेकिन हिन्दुओ को अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी कहने से नहीं चुकते है
हमेशा से ही हिंदु समाज और उनके ग्रन्थ सद्भावना के प्रेरणा स्रोत रहे है जैसा हमारे देश के जिम्मेदार नेता और मंत्री हिन्दुओ के भावनाओ से खिलवाड करते रहते है कभी भी उनकी ये वाणी हिन्दुओ को एक क्रांति कि ओर ढकेल रही है जिसके शैलाब में उन जैसा पिचासु बह जायेंगे, नाश हो जायेगा उनका सब कुछ, अश्तित्व का पता नहीं चलेगा | कमीनों कि सोचना चाहिए कि क्या कभी भी हिन्दुओ ने बेगुनाहों का खून नहीं बहाया है, कभी धर्म् के नाम पर किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया हैये सब जलिलो वाला काम सिर्फ मुसलमान ही करते है क्योकि ऐसा करने से "अल्लाह उन्हें ९ बार मक्का जाने के बराबर बरक्कत देता है, मरने के बाद जन्नत में ७२ हूरो का ऐश मिलता है, और वह जन्नती शराब मिलता है" गजब की शिक्षा देता है कुरआन और उनके मुल्ला, कुरान में शराब पीना गलत है, लेकिन जन्नत में जाने पर जन्नती शराब जरुर अल्लाह देता है




भारत माँ के सिने पर बैठे कमीने मुंग कि दाल रगड रहे , धरती माँ भी पछता रही होंगी ऐसे कमीने कहा से आ गए | कमीनों को क्यों नहीं याद आता है सांसद पर हमला करने का साजीश रचने वाले को जेल में मेहमान बनाकर रखे है | जिस पर लाखो रूपया सलाना होता है उस पर खर्च होने वाला पैसा कौन सा उनके जेब से जा रहा हैफांसी ना देने का सीधा कारण है कि वह मुसलमान है उसके जगह कोई एक हिंदु रहता तो सजा सुनाने के दूसरे दिन ही चोरी से काँग्रेस सरकार फांसी पर चड़ा दी होती | “ अपने आप को सेक्युलर कहलाने वाले बहुत नेता मिल जायेंगे, वो भी ऐसे – ऐसे नेता जो केंद्रीय मंत्री भी रह चुके है (आतंकावादीयो के सिपहसालार कह सकते है) ने तो बंगला देश से आये मुस्लिमो को तो भारत कि नागरिकता देने  की वकालत   भी  करता है, और तो और टी.वी. पर भी हिंदु संगठनो के बिरुद्ध बोलते है" उस कमीने नेता के मुह से कभी भी आतंकवादियों के बारे में कुछ नहीं कहते सुने होंगे क्यों की मुस्लिम वोट नाराज हो जायेंगे बहुत कामिनी सोच है इन कमीनों की |  कितने कमीने है ये सब अगर कोई मापने कि कोशिश करे तो कोई भी मापनी नहीं मापसकती इन्सबो कि कमिनागिरी इनसबो के दिमाग में ये कबी भी नहीं आया और न ही आएगा कि पकिस्तान में हजारों हिंदु को मौत के घात लगाया जाता है, उनके माँ बहनों कि इज्जत लुटी जाती है , रुपये कि वसूली कि जाती है, दरिंदगी भरी हरकते कि जाती है जैसे लोगो को भारत में पूर्ण नागरिकता देनी चाहिए लेकिन ये सब मगरमच्छ के औलाद है, जो शिकार करने के लिए ड्रामा और बहुत कुछ निचले हद तक जा सकते है


मै चाहूँगा कि आप लोग मिल कर प्रार्थना करे कि हे! भगवान इन सब मूर्खो को सद्बुद्धि दे \




हरी  ओम