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स्वर्णलता को याद है पिछले दो जन्म

भोपाल में बॉटनी की एक प्रोफेसर हैं, जिन्हें अपने पिछले दो जन्म आज भी याद हैं।

पुनर्जन्म पर बहुत कम लोग विश्वास करते हैं, लेकिन पुनर्जन्म ज्ञान-विज्ञान के तर्कों से परे है।
बॉटनी की प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी को अपने पिछले दो जन्मों की याद है। श्रीमती तिवारी बॉटनी की प्रोफेसर रहीं और भोपाल के एमवीएम कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुईं।
इतना ही नहीं उन्होंने अपने पिछले जन्म के परिवारों को ना सिर्फ ठीक तरह से पहचाना, बल्कि आज भी उस परिवार से उनका रिश्ता है।
स्वर्णलता के मुताबिक उनका पहला जन्म कटनी में हुआ था। पहले जन्म के भाई जब कटनी से मिलने उनके घर भोपाल पहुंचे तो उन्होंने बगैर किसी दिक्कत के उन्हें झट से पहचान लिया। यहां तक कि स्वर्णलता जब अपने पहले जन्म के अपने घर पहुंचीं तो वहां उन्हें सब कुछ याद था। घर-परिवार के लोग ही नहीं आस-पड़ोस में रहने वालों को भी उन्होंने बखूबी पहचान लिया।
कटनी में अपने पिछले जन्म में स्वर्णलता चार भाइयों में अकेली बड़ी बहन थीं। हालांकि अब उनके पिछले जन्म के चारों भाई इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके पहले जन्म के भतीजे उन्हें आज भी वही सम्मान देते हैं और परिवार में मांगलिक अवसर पर जरूर बुलाते हैं।
वहीं बचपन में एक दिन अचानक बैठे-बैठे उन्हें अपना दूसरा जन्म भी याद आ गया। उनका दूसरा जन्म सिलहट में हुआ था, जहां वो महज आठ-नौ साल की थीं और स्कूल जाते वक्त एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी।
पुनर्जन्म एक ऐसी दास्तां है, जिस पर विज्ञान के अलग-अलग मत है और आज भी इस पर रिसर्च चल रही है। जहां कुछ वैज्ञानिक पुनर्जन्म को महज एक दिमागी भ्रम मानते हैं, वहीं पैरामेडिकल साइंस से जुड़े कुछ वैज्ञानिक इस पर यकीन करने की हिम्मत भी दिखाते हैं।
अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. स्टेफन ने स्वर्णलता के केस का अध्ययन किया और इसे एक्स्ट्रा मेमोरी का नाम दिया।
स्वर्णलता के पहले जन्म के परिजन भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने भारत आकर उनके केस की स्टडी की थी और वर्ष 1964 के आसपास उस जमाने में पुनर्जन्म के मामलों में आई एक अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी में इस केस को दूसरे नंबर पर रखा गया।
स्वर्णलता की खासियत सिर्फ इतनी ही नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी आभास हो जाता है। हालांकि ये सिलसिला पहले के मुकाबले कुछ कम हो गया है। लेकिन ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने भविष्य में होने वाली घटनाओं को पहले ही देख लिया।
उन्होंने सपने में अपने इस जन्म के ससुराल का घर काफी समय पहले ही देख लिया था।

उसकी लंबाई भले ही मात्र 27 इंच है लेकिन उसके ख्वाब बड़े-बड़े हैं।

दुनिया का सबसे छोटा आदमी होने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कोलंबिया का 24 वर्षीय डांसर एडवार्ड निनो हर्नांडेज खुद को अद्भुत व्यक्ति मानता है। उसकी तमन्ना फास्ट कार खरीदने और दुनिया का भ्रमण करने की है। निनो जिन हस्तियों से मिलने की हसरत रखता है, उनमें शामिल हैं जैकी चान, सिल्वेस्टर स्टालान और पूर्व कंबोडियाई राष्ट्रपति एल्वरो यूराइब।

निनों का वजन 10 किलो है और दुनिया का जीवित सबसे छोटा व्यक्ति है। पार्ट टाइम डांसर निनो का कहना कि मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मेरे जैसा और कोई नहीं। वह यह भी खुलासा करता है कि उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है जिसकी लंबाई 5 फीट से कम है।
हालांकि निनो के दोनों आंखों में कैट्रैक्ट्स हैं जिससे उसे धुंधला दिखता है और परिवार के पास उसका इलाज करने के लिए पैसे नहीं हैं, इसके बावजूद उसे एक फिल्म में बतौर ड्रग चोर का रोल मिल गया है। दुनिया का सबसे छोटा आदमी होने और गिनीज बुक में दर्ज होने के बाद चर्चा में आना उसे अच्छा लगता है लेकिन उसकी एक पीड़ा भी है। वह कहता है, 'लोग हमेशा मुझे छूना चाहते हैं और गोद में उठाना चाहते हैं। इससे मुझे बहुत दुख होता है।'
निनों की 43 वर्षीय मां नोएमी हर्नांडेज के मुताबिक वह पांच बच्चों में सबसे बड़ा है और जब वह दो साल का था, तब से उसका बढ़ना रुक गया। डॉक्टर कभी इसका जवाब नहीं सके कि वह क्यों इतना छोटा है। जन्म के समय उसका वजन 1.5 किलो और लंबाई मात्र 15 इंच थी। डॉक्टर इस बात को लेकर अचंभित थे कि वह इतना छोटा क्यों है। उन्होंने तीन साल तक उसका अध्ययन किया लेकिन बाद में उनकी दिलचस्पी खत्म हो गई।
नोएमी और उसके पति, जो एक सेक्यूरिटी गार्ड है, की एक बेटी की 1982 में मौत हो गई थी जो निनो की तरह छोटी थी। उनका सबसे छोटा बेटा 11 साल का है और उसकी लंबाई 37 इंच है। दिमागी तौर पर निनो तेज है लेकिन बार-बार फेल होने के बाद उसने 13 वें वर्ष में स्कूल को अलविदा कह दिया था।
उसकी मां का कहना है कि वह कभी कंबोडिया से बाहर नहीं गया लेकिन उसे घूमना पसंद है। निनो की यह प्रसिद्धि पता नहीं कितने दिन टिकेगी क्योंकि नेपाल का खगेंद्र थापा मागर उसकी जगह ले सकता है। वह अक्टूबर में 18 वर्ष का होने जा रहा है। उसकी लंबाई 22 इंच है और गिनीज बुक में सबसे छोटे जीवित किशोर के तौर पर दर्ज है। इससे पहले दुनिया का सबसे छोटा व्यक्ति चीन का पिंगपिंग था जो उससे 1.5 इंच ज्यादा लंबा था। मार्च में उसकी मौत हो गई थी।

अमेरिका पर 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकी हमले में देश की गुप्तचर सेवा पूरी तरह से विफल रही थी।

राजधानी दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फार डिफेंस स्टडीज एंड एनेलिसिस में सीनियर रिसर्च एसोसिएट राजीव नयन का मानना है कि हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवादी संगठन अलकायदा के खिलाफ जो अभियान शुरू किया था उसमें उसने पाकिस्तान पर भरोसा कर बहुत बड़ी गलती की।

पाकिस्तान कभी भी अमेरिका को इस अभियान में पूरा सहयोग नहीं देगा जिसके कारण उसके सफल होने की संभावना भी कम होगी।
राजीव नयन ने कहा कि आतंकवाद को पालने पोसने करने वाला पाकिस्तान भी अब आतंकवाद का दंश झेल रहा है। आतंकवाद पाकिस्तान की जड़ों में इतने अंदर तक समा गया है कि इसे नष्ट करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारत सहित पूरे विश्व में 11 सितम्बर को हुए आतंकवादी हमले के बाद ऐसे हमले रोकने के लिए व्यापक तैयारी हुई है लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि आतंकवादी पहले के हमले में प्रयोग तरीका नहीं दोहराएंगे।
अमेरिका में 11 सितंबर के हमले में मारे गए लोगों की याद में प्रतिवर्ष 11 सितम्बर ‘पैट्रियट डे’ के रूप में मनाया जाता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 25 अक्टूबर 2001 को संयुक्त प्रस्ताव 71 पारित किया था। प्रस्ताव का 407 सांसदों ने समर्थन किया था जबकि इसके विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा था। प्रस्ताव में अनुरोध किया गया था कि राष्ट्रपति प्रतिवर्ष 11 सितम्बर के दिन को पैट्रिअट डे के रूप में मनाना निर्धारित करें।
तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने 18 सितम्बर 2001 को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप प्रदान कर दिया। शुरूआत में इस दिन को आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने का दिन कहा जाता था। चार सितम्बर 2002 को बुश ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 11 सितम्बर 2002 के दिन को पैट्रिअट डे घोषित कर दिया।
पैट्रिअट डे के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की याद में देश के सभी घरों, राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस, देश एवं विदेशों में स्थित सरकारी इमारतों और प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी झंडे को आधा झुकाने का आह्वान करते हैं। राष्ट्रपति इसके साथ ही सभी नागरिकों से स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 46 मिनट पर कुछ समय के लिए शांति रखने को कहते हैं। यह वही समय है जब आतंकवादियों ने 11 सितम्बर 2001 को अपहृत पहला विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नार्थ टॉवर बिल्डिंग से टकराया था।
11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले में सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्रों के कुछ समुदाय के लोग पैट्रिअट डे के दिन गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। इसके साथ ही 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमले का व्यक्तिगत रूप से साक्षी रहने वाले अथवा इसमें अपने प्रियजनों को खोने वाले लोग मारे गए लोगों की स्मृति स्थलों पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
पैट्रिअट डे के दिन कोई संघीय अवकाश नहीं होता इसलिए इस दिन शिक्षण संस्थाएं और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद नहीं होते। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अपने पूर्व निर्धारित समयानुसार चलती हैं। हालांकि कुछ लोग अथवा संगठन हमले में मारे गए लोगों की याद में कुछ समय के लिए सेवाएं रोक सकते हैं। लेकिन सामान्य तौर पर इसके कारण सार्वजनिक जीवन कुछ मिनट के लिए ही ठहरता है।
11 सितम्बर 2001 को चार विमानों का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता आतंकवादियों ने जानबूझकर महत्वपूर्ण इमारतों से टकराया। इन इमारतों में वाशिंगटन स्थित पेंटागन तथा न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावर शामिल थे। चौथा विमान पेंसिलवानिया के एक मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हमले में करीब तीन हजार लोग मारे गए और काफी बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।
अमेरिका के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था। इस आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई। इस घटना का अमेरिका के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी काफी प्रभाव पड़ा। इस घटना के कारण विशेष रूप से पश्चिम एशिया के इस्लामी देशों के साथ अमेरिका के संबंधों पर काफी प्रभाव पड़ा।

मोटरसाइकिल देवता का मंदिर !

बुलेट मोटरसाइकिल क्या किसी की यात्रा भी सुरक्षित कर सकती है। जी हां राजस्थान के पाली में बुलेट बाबा का मंदिर है जहां लोग सुरक्षित यात्रा के लिए प्रार्थना करने आते हैं।

राजस्थान के पाली ‘बुलेट बाबा’ के नाम से मशहूर मोटरसाइकिल देवता का एक मंदिर है। यहां एक मोटरसाइकिल देवता के रूप में स्थापित है जहां हर रोज सैकड़ों श्रद्धालु अपनी सुरक्षित यात्रा के लिए प्रार्थना करने आते हैं।
जोधपुर के मार्ग में पड़ने वाले पाली से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चोटिला गांव के नजदीक यह मंदिर है, जहां एक 350 सीसी की रॉयल इनफील्ड मोटरसाइकिल बुलेट देवता के रूप में विराजमान है। यहां हर दिन तीर्थयात्रियों का भारी शोरगुल रहता है। प्रत्येक दिन ग्रामीण लोग और यात्री यहां रुककर इस मोटरसाइकिल और इसके दिवंगत मालिक ओम सिंह की प्रार्थना करते हैं। मंदिर में मोटरसाइकिल के पीछे सिंह की एक बड़ी से तस्वीर लगी हुई है, लोग उन्हें प्यार से ओम बाना कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर में रुककर प्रार्थना नहीं करता वह एक खतरनाक यात्रा पर होता है।
कहानी 21 साल पुरानी है। गर्मियों की एक रात ओम बाना पाली से चोटिला लौट रहे थे तभी उनकी मोटरसाइकिल फिसलकर एक पेड़ से टकरा गई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीण बताते हैं कि ओम बाना की मौत के बाद मोटरसाइकिल को एक स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया था लेकिन दूसरे दिन वह फिर घटनास्थल पर पाई गई। शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह किसी की शरारत है इसलिए उसने उसका ईंधन टैंक खाली कर दिया और उसे फिर पुलिस स्टेशन ले गई। अगले दिन फिर वह दुर्घटनास्थल पर मिली। करीब के ही एक गांव में रहने वाले छोटू ने बताया कि जैसे-जैसे यह कहानी फैली ग्रामीणों ने दुर्घटनास्थल पर एक मंच बनाकर वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। मंदिर में एक पुजारी भी है जो रोज की पूजा-अर्चना करता है। वहां आस-पास ही अगरबत्ती, फूलों, नारियल और रक्षा सूत्र की कई दुकानें जहां से लोग इन्हें खरीदकर मंदिर में चढ़ाते हैं। स्थानीय लोग ओम बाना के नाम के लोक गीत गाते हैं। सड़क के लगभग बीचोंबीच स्थित इस मंदिर में वहां से गुजरने वाला प्रत्येक वाहन चालक खासतौर पर पूजा करता है। एक ग्रामीण हेम सिंह राजपूत कहते हैं कि गांव वालों का विश्वास है कि बाना की आत्मा अब भी उस स्थल के आस-पास भटकती है और ग्रामीणों ने उस बुलेट के इंजन की आवाज भी सुनी है।