कुरान की सच्चाई (एक घिनौना रूप) - २/२





















































जिसके धार्मिक पुस्तम में ऐसी बाते लिखी हो, और वो जोर – जोर से चिल्ला के कहे की इस्लाम सब धर्मो से बड़ा है और ऊचा है तो , सायद वह पागल है या किसी आतंकवादी ग्रुप से जुड़ा है| वरना एक भला मानव कभी भी किसी  भी धर्म में मार काट को बर्दाश नहीं करेगा| जैसा की ऊपर लिखित कुरान की आयातो में है|
हे इस्लाम के अंधे मुसलमानों जागो ! और बताओ की कहाँ तुम लोगो को सर्वश्रेष्ठ शिक्षा देता है इस्लाम और कुरआन, यह सिर्फ धर्म के आड में खून खराबा करने के सिवाय कुछ और नहीं है|
मै भारत के मुस्लमान भाईयो से अपील कर रहा हूँ कि “ आओ सुखमय और शांति के तरफ, जहाँ दूसरे कि खुशी अपनी खुशी होती है और दूसरे का दुःख अपना दुःख होता है| आप के पूर्वज हिंदु थे, मुग़ल काल के कस्सायियो ने आप के पूर्वजो को जबरदस्ती मुसलमान बनाया है| जो उनकी बात मान गए वो मुसलमान बन गए और जो नहीं माने उन्हें क़त्ल कर दिया गया| जिसे आप सभी लोग जानते है|”
इसलिए स्वागत है आप लोगो का मानवता का धर्म  “ सनातन धर्म” में|
जय हिंद – जय भारत
बन्देमातरम

इस्लाम में नारीत्व के साथ छलावा

                                इस्लाम के कानून के अनुसार नारी को काम वासना पूर्ति के लिए एक खिलौने के स्तर तक गिरा देने को प्रेरित करता है| इस्लामी कानूनों को इस प्रकार गढा गया है कि प्रभुत्व कि ललक बना नारी का आकर्षण मजहबी निति को लागू करने के लिए नारी कि स्वाधीनता न्यूनतम रह जाए| तथापि, बलात् मतारोपण के द्वारा मुसलमानों को आश्वस्त किया जाता है कि इस्लाम ही वह प्रथम अजहब है जिसने स्त्रियों को निम्लिखित अधिकार दिए :-


१. संपत्ति का अधिकार ( कोई कानून जब तक कानून नहीं है जब तक वह सभी पर सामान रूप से लागू नहीं होता |
इस प्रकार उत्तराधिकारी का कानून पैगम्बर के वंशजो पर भी लागू होना चाहिए यानी पैगम्बर कि पुत्री फातिमा पर उसी प्रभाव से लागू होना चाहिए जिस प्रकार यह अन्य स्त्रियों पर लागु होता है, परन्तु ऐसा नही हुआ |
हदीस संख्या ३:४३५१ (मुस्लिम) इस पर व्यापक रुप से प्रकाश डालती है
२. पति को तलाक देने का अधिकार ( हम पैगम्बरों के उत्तराधिकारी नहीं होते, हम जो पीछे छोड़ जाए है वह दान में ( दे दिया जाना) है
इस हदीस के तर्क को दो प्रकार से स्वीकार करना कठिन है प्रथम तो पैगम्बर ने दवा किया है कि वह सब लोगो के लिए व्यवहार का आदर्श है इसलिए फातिमा को उसकी पैतृक संपत्ति वंचित करना उसके प्रति एकदम अन्यायपूर्ण व् भेदभावपूर्ण कार्य है| जो कानून किसी व्यक्ति के विरुद्ध सिर्फ इसलिए भेदभाव पूर्ण नहीं हो जाता है कि वह पुरुष अथवा स्त्री( फातिमा) या अन्य कोई पुरुष कानून बनाने वाली का सम्बन्धी है|
दूसरा फातिमा को अपने पैतृक संपत्ति के शीघ्र आवश्यकता थी और उसका पति अली भी उसका सामान रुपस ए इच्छुक था| मामला निर्णय के लिए खलीफा अबू बकर के पास भेजा गया, उसने पैगम्बर कि संपत्ति से कुछ भी देने से इंकार कर दिया |
इस कारण अबू बकर से क्रुद्ध हो गयी और उसका परित्याग कर दिया और जीवन पर्यंत उससे बाट नहीं की| जब वह मरी तो उसके पति अली बी, अबू तालिब ने रात्री में ही उसे दफना दिया
उसने अबू बकर को फातिमा की मृत्यु की सूचना भी नहीं दी और जनाजे की नमाज़ भी स्वयं ही संपन्न कर दी|
इससे स्पष्ट है की यदि पैगम्बर अपनी पुत्री को ही पैतृक संपत्ति से कर सकता है तो अन्य स्त्रियों को इस्लाम के उत्तराधिअकारी के कानून से कोई अधिक आशा नहीं करना चाहिए जो केवल कागज पर ही अच्छा दिखाई देता है
परन्तु प्रभाव में ये अधिकार जाली ही है क्योकि स्त्रियों को निम्नलिखित कारणों से इन अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकती :-
क: अल्लाह ने स्त्रियों पर परदे का लागु किया है, अर्थात उन्हें सामाजिक जीवन मे भाग नहीं लेना चाहिए
“ और ईमान वाली स्त्रियों से कहा की अपनी निगाहे नीची रखे और अपने शर्मगाहो की रक्षा करे और अपना श्रृंगार न दिखाए सिवाय उसके जो जाहिर और अपने सिनो (वक्ष स्थल) पर अपनी ओढनिय से आँचल डाले रहे और वे अपने श्रृंगार किसी पर जाहिर ना करे ..........
स्त्रियों को उनके अधिकार से वंचित करने के लिए कुरान में यह प्राविधान है:- “ पुरुष स्त्रियों के निगरां और जिम्मेदार है, इसीलिए की अल्लाह ने एक को दूसरे पर बड़ाई दी है............ तो और जो स्त्रियां नेक होती है वे आज्ञा का पालन करती है ............ और जो स्त्रिया ऐसी होजिनके सरकशी का तुम्हें भय हो, उन्हें समझाओ, बिस्तरों में उन्हें तन्हा छोड़ दो, और उन्हें मारो
चूँकि एक स्त्री के लिए पर्दा अनिवार्य है और वह घर ए ही प्रतिबंधित है औत पुरुष उसका प्रबंधक है, और यदि स्त्री उसकी आज्ञा का उलंघन करे, तो पुरुष को उसे पिटने का अधिकार प्राप्त है, उसके संपत्ति के अधिकार एक ड्रामा बाजी ही है| वे अधिकार ऐसे ही है जैसे आत्मा के बिना शारीर, और तिरो के बिना कमान|
ख. जैसा की पाद टिपण्णीयो में कहा गया है की एक स्त्री के पास पुरुष को तलाक देने का कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है किन्तु खुला से यह अर्थ निकालता है की श्री ऐसा कर सकती है
तथापि पुरुष अपने आप को वैवाहिक बंधन से बिलकुल स्वतन्त्र रुप से इच्छानुसार मुक्त कर सकता है परन्तु एक पत्नी को यह लक्ष प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत पेचीदा क़ानूनी प्रक्रिया से गुजरना हित है
इसके अतिरिक्त यदि एक स्त्री पूर्ण रूपसे औचित्य के बिना पग उठाती है तो उस पर खुदा का कोप एवं फरिस्तो का कहर टूट सकता है
उत्तराधिकारी के कानून एक पुरुष को दो स्त्रियों के बराबर मानता है
( ४ अनानिसा : ११) साक्ष्य का कानून इससे भी अधिक सख्त है: न केवल दो स्त्रियों की साक्ष्य एक पुरुष के बराबर होता है कितु जहा साक्ष्य के लिए पुरुष उपलब्ध हो तो स्त्रियों को साक्ष्य देने की अनुमति नहीं है








क्रमश: ............

पीएफआई की मंशा, केरल मुस्लिम राज्य बने

केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानंदन ने कहा पीएफआई केरल को मुस्लिम राज्य बनाने के चक्कर में है।

केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने शनिवार को कहा कि प्रतिबंधित अतिवादी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की मंशा केरल को अगले 20 वर्षो में मुस्लिम बहुल राज्य बनाना है।
अच्युतानंदन ने संवाददाताओं को बताया, लक्ष्य हासिल करने के लिए यह प्रतिबंधित संगठन युवाओं को आकर्षित करने के लिए पैसे लुटा रहा है और उन्हें हथियार मुहैया करा रहा है। वे अन्य समुदाय के युवाओं को भी धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रहे हैं और मुस्लिम लड़कियों से विवाह के लिए मना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह बयान इसलिए दिया है, क्योंकि उनकी वाम जनतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने प्रतिबंधित संगठन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई शुरू की है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों पैगम्बर मोहम्मद के बारे में कथित तौर पर अनादरपूर्ण बात लिखने के कारण एक कालेज प्राध्यापक का हाथ काट लिया था।
प्रतिबंधित संगठन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई को उचित बताते हुए अच्युतानंदन ने कहा कि पुलिस पीएफआई के कार्यकर्ताओं पर कड़ी नजर रख रही है।

संसार के गुरु हैं हम

सुधारों के लिए जो भी आंदोलन हुए हैं, उनमें से अधिकांश दिखावा मात्र रहे हैं। उन्होंने केवल प्रथम दो वर्णों ही से संबंध रखा है, शेष दो से नहीं। विधवा-विवाह के प्रश्न से सत्तर प्रतिशत भारतीय स्त्रियों का कोई संबंध नहीं है और इस प्रकार के सब आंदोलनों का संबंध भारत के उच्च वर्गों ही से रहा है, जो जनसाधारण का तिरस्कार कर स्वयं शिक्षित हुए हैं।


स्वामी विवेकानंद
इन लोगों ने अपने-अपने घर को साफ करने एवं अंग्रेजों के सम्मुख अपने को सुन्दर दिखाने ही में कोई कसर बाकी नहीं रखी पर यह तो सुधार नहीं कहा जा सकता। सुधार करने में हमें चीज के भीतर उसकी जड़ तक पहुंचना होता है। आग जड़ में लगाआ॓ और उसे क्रमश: ऊपर उठने दो एवं एक अखंड भारतीय राष्ट्र संगठित करो।
अपने जीवन के महान व्रत को याद रखो। हम भारतवासी बहुत परिमाण में विदेशी भावों से आक्रान्त हो रहे हैं, जो हमारे जातीय धर्म की सम्पूर्ण जीवन शक्ति को चुका डालते हैं। हम आज इतने पिछड़े हुए क्यों हैं? क्यों हममें से निन्यानवे फीसद आदमी सम्पूर्णत: पाश्चात्य भावों और उपादानों से विनिर्मित हो रहे हैं? अगर हम लोग राष्ट्रीय गौरव के उच्च शिखर पर आरोहण करना चाहते हैं तो हमें इस विदेशी भाव को दूर फेंक देना होगा, साथ ही यदि हम ऊपर चढ़ना चाहते हैं तो हमें यह भी याद रखना होगा कि हमें पाश्चात्य देशों से बहुत कुछ सीखना बाकी है। पाश्चात्य देशों से हमें उनका शिल्प और विज्ञान सीखना होगा, उनके यहां के भौतिक विज्ञानों को सीखना होगा और उधर पाश्चात्य देशवासियों को हमारे पास आकर धर्म और अध्यात्म-विघा की शिक्षा ग्रहण करनी होगी।
हमको विश्वास करना होगा कि हम संसार के गुरू हैं। हम यहां पर राजनीतिक अधिकार तथा इसी प्रकार की अन्य बातों के लिए चिल्ला रहे हैं। अच्छी बात है, परन्तु अधिकार और सुभीते केवल मित्रता के द्वारा ही प्राप्त हो सकते हैं और मित्रता की आशा वहीं की जा सकती है, जहां दोनों पक्ष समान होते हैं। यदि एक पक्ष वाला जीवन-भर भीख मांगता रहे तो क्या यहां पर मित्रता स्थापित हो सकती है? ये सब बातें कह देना बहुत आसान है, पर मेरा तात्पर्य यह है कि पारस्परिक सहयोग के बिना हम लोग कभी शक्ति सम्पन्न नहीं हो सकते। इसीलिए मैं तुम लोगों को धर्माचार्य के रूप में इंग्लैंड जाने को कह रहा हूं। हमें अपने सामर्थ्य के अनुसार विनिमय का प्रयोग करना होगा। यदि हमें इस लोक में सुखी रहने के उपाय सीखने हैं, तो हम भी उसके बदले में क्यों न उन्हें अनन्त काल तक सुखी रहने के उपाय बताएं।

स्वर्णलता को याद है पिछले दो जन्म

भोपाल में बॉटनी की एक प्रोफेसर हैं, जिन्हें अपने पिछले दो जन्म आज भी याद हैं।

पुनर्जन्म पर बहुत कम लोग विश्वास करते हैं, लेकिन पुनर्जन्म ज्ञान-विज्ञान के तर्कों से परे है।
बॉटनी की प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी को अपने पिछले दो जन्मों की याद है। श्रीमती तिवारी बॉटनी की प्रोफेसर रहीं और भोपाल के एमवीएम कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुईं।
इतना ही नहीं उन्होंने अपने पिछले जन्म के परिवारों को ना सिर्फ ठीक तरह से पहचाना, बल्कि आज भी उस परिवार से उनका रिश्ता है।
स्वर्णलता के मुताबिक उनका पहला जन्म कटनी में हुआ था। पहले जन्म के भाई जब कटनी से मिलने उनके घर भोपाल पहुंचे तो उन्होंने बगैर किसी दिक्कत के उन्हें झट से पहचान लिया। यहां तक कि स्वर्णलता जब अपने पहले जन्म के अपने घर पहुंचीं तो वहां उन्हें सब कुछ याद था। घर-परिवार के लोग ही नहीं आस-पड़ोस में रहने वालों को भी उन्होंने बखूबी पहचान लिया।
कटनी में अपने पिछले जन्म में स्वर्णलता चार भाइयों में अकेली बड़ी बहन थीं। हालांकि अब उनके पिछले जन्म के चारों भाई इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके पहले जन्म के भतीजे उन्हें आज भी वही सम्मान देते हैं और परिवार में मांगलिक अवसर पर जरूर बुलाते हैं।
वहीं बचपन में एक दिन अचानक बैठे-बैठे उन्हें अपना दूसरा जन्म भी याद आ गया। उनका दूसरा जन्म सिलहट में हुआ था, जहां वो महज आठ-नौ साल की थीं और स्कूल जाते वक्त एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी।
पुनर्जन्म एक ऐसी दास्तां है, जिस पर विज्ञान के अलग-अलग मत है और आज भी इस पर रिसर्च चल रही है। जहां कुछ वैज्ञानिक पुनर्जन्म को महज एक दिमागी भ्रम मानते हैं, वहीं पैरामेडिकल साइंस से जुड़े कुछ वैज्ञानिक इस पर यकीन करने की हिम्मत भी दिखाते हैं।
अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. स्टेफन ने स्वर्णलता के केस का अध्ययन किया और इसे एक्स्ट्रा मेमोरी का नाम दिया।
स्वर्णलता के पहले जन्म के परिजन भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने भारत आकर उनके केस की स्टडी की थी और वर्ष 1964 के आसपास उस जमाने में पुनर्जन्म के मामलों में आई एक अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी में इस केस को दूसरे नंबर पर रखा गया।
स्वर्णलता की खासियत सिर्फ इतनी ही नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी आभास हो जाता है। हालांकि ये सिलसिला पहले के मुकाबले कुछ कम हो गया है। लेकिन ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने भविष्य में होने वाली घटनाओं को पहले ही देख लिया।
उन्होंने सपने में अपने इस जन्म के ससुराल का घर काफी समय पहले ही देख लिया था।

उसकी लंबाई भले ही मात्र 27 इंच है लेकिन उसके ख्वाब बड़े-बड़े हैं।

दुनिया का सबसे छोटा आदमी होने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कोलंबिया का 24 वर्षीय डांसर एडवार्ड निनो हर्नांडेज खुद को अद्भुत व्यक्ति मानता है। उसकी तमन्ना फास्ट कार खरीदने और दुनिया का भ्रमण करने की है। निनो जिन हस्तियों से मिलने की हसरत रखता है, उनमें शामिल हैं जैकी चान, सिल्वेस्टर स्टालान और पूर्व कंबोडियाई राष्ट्रपति एल्वरो यूराइब।

निनों का वजन 10 किलो है और दुनिया का जीवित सबसे छोटा व्यक्ति है। पार्ट टाइम डांसर निनो का कहना कि मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मेरे जैसा और कोई नहीं। वह यह भी खुलासा करता है कि उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है जिसकी लंबाई 5 फीट से कम है।
हालांकि निनो के दोनों आंखों में कैट्रैक्ट्स हैं जिससे उसे धुंधला दिखता है और परिवार के पास उसका इलाज करने के लिए पैसे नहीं हैं, इसके बावजूद उसे एक फिल्म में बतौर ड्रग चोर का रोल मिल गया है। दुनिया का सबसे छोटा आदमी होने और गिनीज बुक में दर्ज होने के बाद चर्चा में आना उसे अच्छा लगता है लेकिन उसकी एक पीड़ा भी है। वह कहता है, 'लोग हमेशा मुझे छूना चाहते हैं और गोद में उठाना चाहते हैं। इससे मुझे बहुत दुख होता है।'
निनों की 43 वर्षीय मां नोएमी हर्नांडेज के मुताबिक वह पांच बच्चों में सबसे बड़ा है और जब वह दो साल का था, तब से उसका बढ़ना रुक गया। डॉक्टर कभी इसका जवाब नहीं सके कि वह क्यों इतना छोटा है। जन्म के समय उसका वजन 1.5 किलो और लंबाई मात्र 15 इंच थी। डॉक्टर इस बात को लेकर अचंभित थे कि वह इतना छोटा क्यों है। उन्होंने तीन साल तक उसका अध्ययन किया लेकिन बाद में उनकी दिलचस्पी खत्म हो गई।
नोएमी और उसके पति, जो एक सेक्यूरिटी गार्ड है, की एक बेटी की 1982 में मौत हो गई थी जो निनो की तरह छोटी थी। उनका सबसे छोटा बेटा 11 साल का है और उसकी लंबाई 37 इंच है। दिमागी तौर पर निनो तेज है लेकिन बार-बार फेल होने के बाद उसने 13 वें वर्ष में स्कूल को अलविदा कह दिया था।
उसकी मां का कहना है कि वह कभी कंबोडिया से बाहर नहीं गया लेकिन उसे घूमना पसंद है। निनो की यह प्रसिद्धि पता नहीं कितने दिन टिकेगी क्योंकि नेपाल का खगेंद्र थापा मागर उसकी जगह ले सकता है। वह अक्टूबर में 18 वर्ष का होने जा रहा है। उसकी लंबाई 22 इंच है और गिनीज बुक में सबसे छोटे जीवित किशोर के तौर पर दर्ज है। इससे पहले दुनिया का सबसे छोटा व्यक्ति चीन का पिंगपिंग था जो उससे 1.5 इंच ज्यादा लंबा था। मार्च में उसकी मौत हो गई थी।